मोहम्मद मसूद रजा पर जानलेवा हमला करने वाली पुलिस के खिलाफ चार दिन बाद भी नहीं दर्ज हुआ एफआईआर

सरकार अपराधियों के साथ, आम आदमी हवालात में- रिहाई मंच
भ्रष्टाचार की लड़ाई लड़ने की वजह से अधिवक्ता मसूद पर हुआ पुलिसिया हमला
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और राज्य मानवाधिकार आयोग दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करे

लखनऊ 21 मई 2018।

भ्रष्टाचार के विभिन्न मामलों को उठाने वाले उतरौला बलरामपुर के अधिवक्ता मोहम्मद मसूद रजा पर पुलिसिया हमले के चार दिनों बाद भी एफआईआर दर्ज नहीं हुई है.

बलरामपुर के उतरौला थाने में पिछले दिनों एडवोकेट मोहम्मद मसूद रजा पर हमले के बाद आज उनके भाई सेराजुल हक और अब्दुल हफीज खान ने रिहाई मंच से मुलाकात कर बताया कि चार दिन बीत जाने के बाद भी एफआईआर नहीं दर्ज हुई है।

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एडवोकेट मसूद रजा  ने (जो गंभीर रुप से पुलिसिया हमले में घायल हैं) फोन पर बताया कि उन्होंने इसकी षिकायत एसपी बलरामपुर, मुख्यमंत्री, बार काउंसिल, डीजीपी, मानवाधिकार आयोग और अन्य जगहों पर की है। उतरौला बार एसोशिऐसन ने कोतवाल सहित दोषी पुलिस कर्मियों के निलंबन की मांग की है। इस पर एसपी, बलरामपुर ने एफआईआर दर्ज करने का आष्वासन दिया है. अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। स्थानीय स्तर पर यह भी सूचना है कि पुलिस एक और फर्जी मामले में मसूद रजा समेत अन्य को अभियुक्त बनाकर उनको फर्जी मुकदमें में फंसाना चाहती है।

राजीव यादव ने बताया कि मसूद रजा ने बलरामपुर चीनी मिल से हो रहे प्रदूषण जैसे अहम मुद्दों को हाई कोर्ट तक लाकर लड़ाई लड़ी ताकि आम अवाम और जीव जन्तु सरक्षित रह सकें। आज मसूद रजा पर हुआ पुलिसिया हमला भ्रष्टाचारी कंपनी और पुलिस के गठजोड़ का नतीजा है जो नहीं चाहती कि उनके मुनाफे के कारोबार को कोई धक्का लगे।

16 मई 2018 को मसूद रजा, शाकिर के साथ उतरौला पुलिस स्टेषन एक मामले को लेकर गए। जहां पीड़ित पक्ष ने एफआईआर करने की बात एसएचओ से की। लेकिन एसएचओ एफआईआर दर्ज करने के बजाए एडवोकेट मसूद रजा को गाली देने लगे। वहीं मौजूद मसूद के छोटे भाई हसमत रजा का मोबाइल पुलिस ने छीन लिया और कहा कि ये वीडियो बना रहा था, इसको भी पीटो जिससे वीडियो बनाना भूल जाए। हसमत किसी तरह वहां से भाग निकले। इस सब पर जब मसूद ने आपत्ति दर्ज की तो पुलिस उन्हें बेरहमी से पीटने लगी। जब किसी तरह जान बचाकर भागने लगे तो पुलिस उन्हें फिर से चैराहे से घसीटते हुए लाकर थाने पर पीटने लगी और कहा कि बड़ा वकील बनता है, इलाहाबाद के वकील की तरह इसका भी इनकाउंटर कर दो। कोतवाल संतोष कुमार सिंह के साथ दर्जन भर पुलिस वालों ने पीट-पीटकर मसूद को अधमरा कर दिया। जिससे उनके सीने, कान, सिर, हाथ-पैर समेत पूरे जिश्म में गंभीर चोटें आईं। इसके बाद पुलिस ने मसूद को लाकअप में बंद कर दिया और ऊपर से केस भी लगा दिया। इसके बाद कोतवाल संतोष सिंह हसमत रजा को खोजवाने लगे और कहा कि उसको जैसे भी हो पकड़ कर लाओ, तीनों का एनकाउंटर कर देंगे।

रिहाई मंच ने कहा कि मसूद चोटों की वजह से गंभीर रुप से अस्वस्थ हैं। मंच जल्द उतरौला, बलरामपुर जाकर उनसे मुलाकात करेगा

 

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