गौकशी के नाम पर बच्चे और नाबालिगों को जेल भेजने वाले पुलिसकर्मियों पर हो कार्यवाही

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मुज़फ्फरनगर/लखनऊ 18 मई 2018. खतौली मुज़फ्फरनगर के बुढाना रोड पर रिहाई मंच महासचिव राजीव यादव ने लोकदल के जिला मुजफ्फरनगर महाससिव इंजी. उस्मान अहमद के साथ गौकशी के आरोप में जेल गए नाबालिग बच्चों और महिलाओं से बातचीत की व सच्चाई को जाना। प्रथम दृष्टिया रिहाई मंच ने माना कि गौकशी के आरोप मे जेल भेजी गई दो बच्चियां लाईबा, शीबा और लड़का अजीम नाबालिग है जिसकी पुस्टि उनके आधार कार्ड से भी होती है. पुलिस झूठी बयानबाजी कर रही है कि बच्चे बालिग हैं. पुलिस ने मेडिकल के नाम पर जो बच्चों की उम्र लिखवाई वो सिपाही के कहने पर लिखी गई बच्चे कहे पर किसी ने उनकी एक न सुनी. आधार कार्ड में लिखी उम्र को भी पुलिस ने खारिज करते हुए मासूम बच्चों पर पुलिस पर हमला, हत्या का प्रयास जैसे आरोप लगाकर जेल की सलाखों के पीछे धकेल दिया.

रिहाई मंच नेता ने साढ़े तीन महीने जेल में रहकर आईं 17 वर्षीय शीबा, 13  वर्षीय लायबा, 15 वर्षीय अजीम और दूध पीते बच्चे सुभान व उनके साथ जेल गईं महिलाओं से मुलाकात करते हुए कहा कि पुलिस को शर्म आनी चाहिए कि उसने छोटे-छोटे बच्चों को गौकसी के नाम पर पकड़ कर जेल भेज दिया औऱ अब कह रही है कि बच्चे नहीं बालिग हैं. जबकि कई फोन कॉल में उसने उनके नाबालिग होने को स्वीकारा है. मुलाकात में बच्चों ने बताया कि उस दिन वो सो रहे थे एकाएक पुलिस आई मारते-पीटते गाड़ी में भर दिया. मेडिकल करवाने डॉक्टर के यहां गए तो सिपाही ने दरोगा जी से फोन कर पूछा कि कितनी उम्र लिखवा दें, तो दरोगा जी ने 22 लिखवाने को कहा तो वही लिखवा दी गई. अब जब मानवाधिकार आयोग ने मुख्य सचिव और डीजीपी को विस्तृत रिपार्ट देने को कहा तो पुलिस अखबारी बयानबाजी कर रही है कि बच्चियां-बच्चे बालिग हैं, ऐसा करके वह जहां जांच को प्रभावित कर रही है वहीं पीड़ितों पर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है.

रिहाई मंच ने कहा कि पुलिस को बताना चाहिए कि वो किस आधार पर बालिग कह रही है, क्या उसे बच्चों का आधार कार्ड देखना वाजिब नहीं लगा और अगर वह अपने कहे अनुसार झूठी मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर कह रही है तो ऐसे में मासूम बच्चों को झूठे केस में फसाने के इस मामले में डॉक्टर भी दोषी हैं.

रिहाई मंच नेता ने आरोप लगाया कि थानेदार अम्बिका प्रसाद भारद्वाज साम्प्रदायिक और आपराधिक जेहनियत के हैं तभी उन्होंने नाबालिग बच्चियों-बच्चों और महिलाओं को गिरफ्तार किया. जबकि गाय क्या किसी भी जानवर को काटने में महिलाओं की भूमिका की कोई परम्परा नहीं है. एक समुदाय से नफरत रखने के चलते ये गिरफ्तारी की गई. पिछले दिनों पुलिस ने इसी आपराधिक साम्प्रदायिक मानसिकता के चलते 27 अप्रैल को नई आबादी के एक मामले में इस मामले के दो अभियुक्तों नसीमुद्दीन और वकील पर आरोप लगाया है. इस पूरी गिरफ्तारी में कोई महिला पुलिस नहीं थी और पुरुष पुलिस ने मारा-पीटा भी जो मानवाधिकार का गंभीर मसला है.

बच्चों के दादा हाजी नासिर ने झूठी गिरफ्तारी को लेकर मुज़फ्फरनगर कप्तान से भी शिकायत की कि कुछ मुखबिर टाइप के लोग पुलिस के साथ मिलकर अवैध वसूली का दबाव बनाते हैं और न मिलने पर उनके बेटे वकील जिसने दूध का व्यपार करने को भैंस की डेरी खोली थी उसे बंद करवा दिया.

पुलिस ने 29 दिसम्बर 2018 को सुबह साढ़े 5-6 बजे के करीब गौकसी के नाम पर मुज़फ्फरनगर के खतौली के इस्लाम नगर से गिरफ्तारियां करते हुए दस कुंतल मांस की बरामदगी का दावा किया.  इस मामले में महिलाएं और नाबालिग-दूध पीते बच्चे तक को गिरफ्तार किया गया. पिछले दिनों इलाहाबाद हाईकोर्ट से उन्हें बेल मिली. इस मामले में शीबा, लायबा, अजीम बच्चों, शहजादी, अफसाना, रेशमा महिलाओं के साथ शाहबाज, महताब, अशफाक, नसीमुद्दीन, दानिश, मोनू और अशरफ को अभियुक्त बनाया.

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