आजमगढ़ पुलिस ने पैर में कपड़ा बांध घुटने में मारी गोली, मुठभेड़ में किया गिरफ्तारी का दावा

 

सवाल उठने पर घायलों के साथ किया दो को कोर्ट में किया पेश एक को छोड़ा

रिहाई मंच प्रतिनिधि मंडल ने फर्जी मुठभेड़ के पीड़ितों के परिजनों से मुलाकात कर जारी की रिपोर्ट

 

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लखनऊ 4 मई 2018. आजमगढ़ से लौटकर मेंहनगर थाना क्षेत्र के पांच युवकों के पुलिस द्वारा उठाने और पैर में गोली मारकर फर्जी मुठभेड़ में गिरफ्तार करने के दावे पर रिहाई मंच ने सवाल उठाया. रिहाई मंच महासचिव राजीव यादव, लक्ष्मण प्रसाद और अनिल यादव ने पीड़ितों के परिजनों से मुलाकात की. रिहाई मंच ने 15 अप्रैल को हुए पुलिसिया मुठभेड़ के दावे पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पूरा मामला ही फर्जी है. तत्कालीन एसएपी अजय साहनी ने अपने करीबी एसओजी के अरविन्द यादव के जरिये इसे अंजाम दिलवाया. प्रतिनिधि मंडल ने मेंहनगर थाना क्षेत्र के मुठभेड़ में घायल पंकज यादव, राजतिलक और अमरजीत के परिजनों से मुलाकात की. इस मामले में राम वृक्ष यादव के पुत्र विनोद यादव को भी उठया गया था पर मामला सार्वजानिक होने के बाद 15 अप्रैल की रात निजामाबाद बुलाकर उनको उनके पिता को सुपुर्द कर दिया गया. वहीँ अमरजीत यादव और रवि साहू को 15 अप्रैल की शाम को गिरफ्तारी का दावा करते हुए पंकज और राजतिलक के साथ कोर्ट में पेश कर दिया गया.

 

प्रतिनिधि मंडल को मुठभेड़ में घायल पंकज यादव निवासी ग्राम हटवा खालसा थाना मेंहनगर, आजमगढ़ के पिता रामवृक्ष यादव ने बताया कि पंकज यादव को फ्रूटी कंपनी, फूलपुर वाराणसी से 14 अप्रैल को दिन में दो बजे उठाने के बाद दूसरे दिन भोर में गोसाई की बाजार में फर्जी मुठभेड़ में पैर में गोली मारकर गिरफ्तारी का दावा किया गया। पंकज के पिता ने बताया कि उनके भतीजे ने उनको फोन पर बताया तो वह तुरंत 100 नंबर पर फोन किया। पंकज की बहन ने भी 100 नंबर पर फोन करके अपने भाई के उठाए जाने की सूचना-शिकायत दर्ज करवाई।

 

प्रतिनिधि मंडल को मुठभेड़ में घायल दूसरे पीड़ित राजतिलक सिंह निवासी ग्राम वीरभानपुर थाना मेंहनगर के पिता राजतिलक सिंह ने बताया कि 13 अप्रैल 2018 को 9 बजे सादी वर्दी में आए लोगों ने उसे बुलाया और उठाकर लेकर चले गए। पूछने पर उन लोगों ने कुछ सही से बताया नहीं। चाचा अजय सिंह बताते हैं कि राजतिलक चाची के साथ शाम 4 बजे के करीब आनंद क्लीनिक मेंहनगर डा0 विजय के यहां दवाई लेने गया था। साढ़े 7 के करीब वो घर लौटा। राजतिलक पुणे में ड्राइवरी करता था पर तबीयत खराब होने के चलते वो घर लौट आया था। पिछली 6 नवंबर को वह आया था 23 नवंबर को बहन की शादी थी। राजतिलक 2 भाई 3 बहन हैं।

 

राजतिलक के पिता विनय सिंह बताते हैं कि 13 अप्रैल को उठा ले जाने के बाद जब उसका कोई अता-पता नहीं चला। वे थाने भी गए तो उस दिन अंबेडकर जयंती होने के चलते और भी कोई अधिकारी नहीं बता रहा था। तो उन्होंने दिन में 2.49 बजे मुख्यमंत्री, 2.31 पर एसएसपी, 2.38 पर प्रमुख सचिव, 2.34 पर डीआईजी, 2.36 पर जिलाधिकारी और 2.29 पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को फैक्स कर बेटे के उठाए जाने की सूचना दी। उनके करीबी एक वकील साहब ने डीआईजी साहब से फोन पर बात की। उस दिन कुछ पता नहीं चला तो घर लौट आये और दूसरी सुबह जब आजमगढ़ आ रहे थे उनको किसी ने फोन पर बताया कि एक लड़के के पैर में गोली मारकर गोसाई बाजार, रानी की सराय के पास पुलिस ने दिखाया है। वे बताते हैं की उसके बाद हम लोग भागकर सदर अस्पाल गए वहां मालूम नहीं चला। बाद में जब मालूम चला तो बीएचयू के लिए भागे। शाम को 6 बजे उसको कोर्ट में पेश कर दिया गया।

 

प्रतिनिधि मंडल को अमरजीत यादव निवासी जमकी थाना मेंहनगर, आजमगढ़ के भाई संतोष यादव बताते हैं कि उनका भाई 14 अप्रैल को बोलेरो गाड़ी लेकर निकला था उसके बाद उसका कोई अता-पता नहीं चला। बाद में मालूम चला उसको पकड़ कर जेल भेज दिया गया है।

 

विनोद यादव पुत्र राम वृक्ष यादव, निवासी  ग्राम हटवा खालसा थाना मेंहनगर, आजमगढ़ के पिता राम वृक्ष प्रतिनिधि मंडल को बताते हैं कि 13 को विनोद ससुराल गया था। 13 की रात में राजतिलक को उठाने के बाद जब विनोद ससुराल से आ रहा था तो चक्रपानपुर में उससे मुलाकात हुई। मैंने उसकी पत्नी जो उसके साथ आ रही थी को बोलेरो में बैठाने और अमरजीत को विनोद के साथ मोटर साइकिल पर आने को कहा। 10 बजे दिन के करीब सुम्भी बाजार में एसओजी के अरविंद यादव ने उनकी बाइक में टक्कर मारकर उन्हें गिरा दिया और दोनों को गाड़ी में लाद लिया और उनकी गाड़ी का नंबर प्लेट तोड़वा दिया। उसके बाद इनको इटौरा, चंडेशर जेल ले गए। रात करीब 11 बजे रानी की सराय थाने में पंकज, राजतिलक, अमरजीत, रवी और विनोद की मुलाकात हुई। विनोद को 2 बजे निजामाबाद थाने भेज दिया गया।

 

वे बताते हैं की कोटिला नहर के पास राजतिलक के दोनों हाथ बांधकर तालाब के किनारे ले जाकर घुटने में दो गोली मार दी। पंकज को गोसाई की बाजार के पास ले जाकर दोनों हाथ बांधकर पैर में कुछ लपेटकर उसके भी घुटने में दो गोली मार दी। उसके बाद एक बैडेज के टुकड़े को उसके पैर में बह रहे खून से चिपकाकर एक पुलिस वाले के बांह में लगा दिया। और उसे घायल बता दिया।

 

रिहाई मंच ने पूरे सूबे में चल रही फर्जी मुठभेड़ को योगी सरकार की रणनीति करार देते हुए कहा की उत्तर प्रदेश की जनता भाजपा और संघ परिवार से जुड़े गुंडों से त्रस्त हो गयी है. सरकार से संरक्षण में सामन्ती ताकतें आम लोगों का जीना दूभर कर दी हैं. इन सवालों से बचने के लिए योगी पुलिस फर्जी मुठभेड़ के नाम पर दलितों पिछड़ों और मुस्लिमों को चिन्हित करके फर्जी मुठभेड़ में मार रही है. आगामी 6 मई को 3.30 बजे लखनऊ निशातगंज के कैफ़ी आज़मी एकडमी में होने वाले सम्मलेन में फर्जी मुठभेड़ का सवाल उठेगा.

 

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