कल्लूरी पर हुई कार्रवाई के बाद बेला भाटिया ने कहा बस्तर का हर आदिवासी सुरक्षित होना चाहिए

छुट्टी पर भेजे गए बस्तर के विवादित आईजी शिवराम कल्लूरी पर हुई कार्रवाई के बाद मशहूर मानवाधिकार कार्यकर्ता बेला भाटिया ने कहा है कि उनकी लड़ाई किसी अफसर से नहीं बल्कि उन नीतियों से है जहां बेगुनाह आदिवासी आए दिन मार दिए जाते हैं. उन्होंने कहा, ‘आईजी साहब जाते-जाते कह गए हैं कि बेला भाटिया जीत गई, लेकिन मामला जीत-हार से ज्यादा बेगुनाह आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों को सुरक्षित और संरक्षित रखने का है.

बेला का कहना है कि एक कल्लूरी की विदाई से फौरी राहत नजर आ रही हैं लेकिन बस्तरवासियों को स्थायी राहत तब मिलेगी जब वहां न्यायपूर्ण शांति स्थापित होगी. शिवराम कल्लूरी पर हुई कार्रवाई के बाद उन्होंने कैच न्यूज़ से बात की.

सवाल-जवाब

आप के घर पर हुए हमले के बाद सरकार की पूरी कार्रवाई को कैसे देखती है?

मुझे खुशी है कि सरकार ने अपनी जवाबदेही का परिचय दिया, लेकिन अब भी उन तत्वों पर सख्ती जरूरी है जिसके जरिए बस्तर को अशांत करने की षडयंत्र रचा गया है. वे लोग कौन हैं जो एक महिला को सरेआम काटने और मारने की धमकी देते हैं? ये अग्नि संस्था किसकी है? इसके कर्ता-धर्ता कौन हैं?

पिछले महीने 22 और 23 जनवरी को जगदलपुर के परपा में जब मेरे घर पर हमला हुआ, तब पुलिस भी वहां मौजूद थी. मुझे मार देने और काट देने की धमकी दी गई. हमलावर एक गाड़ी क्रमांक सीजी-17 – 3056 में सवार होकर आए थे. मैंने परपा के दिनेश ठाकुर, जगदलपुर के राज और टकलू के नाम के साथ-साथ पूरे घटनाक्रम का वीडियो पुलिस को सौंपा है, लेकिन अब तक हमलावरों पर कार्रवाई नहीं हुई. सरकार को पूरी पड़ताल कर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए ताकि बस्तर में अराजकता फैलाने वालों को सबक मिले.

आपको बस्तर छोड़ने को कहा गया था. अब क्या स्टैंड है आपका?

मैं परपा में जहां रहती हूं वहां से केवल घर शिफ्ट कर रही हूं. मेरे आवेदन के बाद कलक्टर ने जगदलपुर में मेरे लिए एक दो कमरे के मकान की व्यवस्था की है. मैं जल्द ही वहां शिफ्ट हो जाउंगी और एक नागरिक की हैसियत से अपनी जवाबदेही का निर्वहन करती रहूंगी. एक नागरिक की जवाबदेही यही होती है कि जो कुछ भी उसके आसपास गलत हो रहा है उस पर लोकतांत्रिक ढंग से अपना हस्तक्षेप दर्ज करें. बेला भाटिया फिलहाल यही कर रही हैं और आगे भी यही करते रहेंगी.

आईजी कल्लूरी की विदाई से क्या बस्तर शांत हो जाएगा?

बस्तर में लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के साथ काम करने की जरूरत है. जब भी कभी संविधान और नियमों-कानून की धज्जियां उड़ती हैं तो उसके परिणाम बेहद भंयकर होते हैं. हमें देखना होगा कि बस्तर में कल्लूरी के जाने के बाद सरकार और क्या-क्या बदलाव करती है. सरकार को यह समझना ही चाहिए कि आदिवासियों का भी अपना जीवन है और वे अपनी संस्कृति के साथ हंसी-खुशी रहना चाहते हैं. जिस दिन ऐसा होगा बहुत कुछ सकारात्मक हो जाएगा.

क्या अब भी आप खतरा महसूस करती हैं?

खतरा तो तब से बना हुआ है जब से मेरे बारे में यह पर्चा बांटा गया है कि मेरा संपर्क माओवादियों से हैं. जब पुलिस वालों ने सोनी सोरी और मनीष कुंजाम के साथ मेरा भी पुतला फूंका, तब भी लगा कि खतरा उन लोगों से ही हैं जिन पर संविधान के पालन की जिम्मेदारी दी गई है. घर पर हुए हमले के बाद सरकार ने सुरक्षा तो दी है, लेकिन मेरा मानना है कि मेरे अकेले की सुरक्षा से क्या होगा? बस्तर का हर आदिवासी सुरक्षित होना चाहिए.

-राजकुमार सोनी

 

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