प्रभु की माया -अमोल सरोज

प्रभु की माया

प्रभु यानी सुरेश प्रभाकर प्रभु।भारतीय रेलवे के ऑनलाइन टीटी।

suresh-prabhu

पहले दिल कर रहा था प्रभु को चिट्ठी लिखी जाए। पर प्रभु को चिट्टी लिखना सही नहीं होता। कलयुग में प्रभु को ट्वीट किया जा सकता है चिट्टी लिखना देशद्रोह में आ सकता है। चिठ्ठी का इरादा छोड़ दिया। ट्वीटर की क्लास में हमसे पांचवी की परीक्षा पास नहीं हुई। हर बार उसी में बैठते है और फ़ैल होकर ट्वीटर की पढाई छोड़ने का इरादा करते है। तो मैंने चिट्टी का ख्याल छोड़ उनकी तारीफ़ में एक लेख लिखने का विचार किया। अनपढ़ लोगो के देश में पढ़ा लिखा होना गुनाह है। हमारे प्रभु के साथ यही हो रहा है। चार्टर्ड अकाउंटेंट में ग्याहरवी रैंक लिए हुए है। वकालत भी की हुई है। भारत की रेलवे का स्तर उठाने के लिए कमर कसे हुए है पर अनपढ़ लोग है उनकी रेल भी अनपढ़ है। लोगो को ट्वीट करना नहीं आता। रेल को भी नहीं आता। जिस देश के लोगो और उसकी रेलो को ट्वीट करना नहीं आता उस देश का रेलमंत्री होना कितना मुश्किल काम है आप अंदाजा लगा सकते है।

मुर्ख और देश द्रोही लोग रेल दुर्घटना के लिए प्रभु को दोषी बता रहे है। इस देश का दुर्भाग्य है ये कि जो मंत्री देश के लिए दिन में साढ़े 23 घंटे काम करता है ( 24 घंटे नहीं लिख सकता। 24 घंटे का स्लॉट प्रधानमंत्री जी के लिए बुक है। मैं यहाँ प्रभु जी की तारीफ के लिए आया हूँ उनका पत्ता कटाने नहीं ) खैर जो मंत्री साढ़े तेईस घंटे ट्वीटर पे रेल की सेवा के लिए मौजूद हो उसपे ऐसे आरोप लगाना देशद्रोह नहीं तो और क्या है ? नवम्बर 2014 से वो रेल मंत्री है और ,अल्लाह राजनाथ जी को सलामत रखे इस्तीफो का कोई प्रचलन तो NDA में है नहीं , अभी आगे भी रहने ही है। मेरी लिस्ट के कितने ही दोस्त और उनके स्टेटस हमारे मंत्री की कार्यकुशलता के सबूत है। एक दोस्त ने रात के 12 बजे ट्वीट किया था कि प्रभु ट्रैन के टॉयलेट में हूँ। यहाँ डब्बा नहीं है पानी का। अगले स्टेशन में उसे साक्षात् प्रभु एकदम नया डब्बा लिए खड़े मिले। एक और दोस्त का स्टेटस पढ़ा था। उसने प्रभु को ट्वीट किया प्रभु ट्रैन में भीड़ बहुत थी मैं स्टेशन पर उतर नहीं सका। अगले ही मिनट ट्रैन ने यू टर्न ले लिया। ट्रैन वापस उस स्टेशन पर गई जिसपे दोस्त को उतरना था। वहां भी प्रभु उस दोस्त का इन्तजार कर रहे थे। दोस्त ने बहुत मना किया पर प्रभु दोस्त को उसके घर तक अपनी ऑटो में छोड़ के आये। वो भी मीटर से, जबकी प्रभु अच्छे से जानते थे कि जहाँ मेरे दोस्त का घर है वहां से वापसी में सवारी भी नहीं मिलनी। ऐसे कितने ही स्टेटसों से फेसबुक अटा पड़ा है फिर भी लोगो का क्या है बिना हड्डी की जीभ है बक दिया कुछ भी।

रेल दुर्घटनाओ पे आउ उससे पहले प्रभु की काबिलियत और सफलताओ पर नजर डाल ले। सबसे पहली सफलता तो उन्होंने पैदा होने से नौ महीने पहले ही प्राप्त कर ली थी। उन्होंने गौड़ सारस्वत ब्राह्मण के घर जन्म लिया। उसी जाति में जिसमें अपने महान राजदीप सरदेसाई जी ने जन्म लिया। वैसे तो उनके पास बहुत ऑप्शन थे पैदा होते वक़्त पर उन्होंने गौड़ सारस्वत ब्राह्मण को चुना क्योंकि उन्होंने 2014 में राजदीप जी को प्राइड महसूस कराना था। कितने महान है प्रभु। वो सिर्फ खुद ही गौर सारस्वत ब्राह्मण के घर पैदा नहीं हुए। साथ मनोहर पर्रिकर जी को भी जुगाड़ लगाके गौड़ सारस्वत के घर पैदा करवाया ताकि राजदीप जी डबल प्राइड महसूस कर सके। मनोहर पर्रिकर जी की तारीफ में तो किताब लिखने लायक मैटेरियल है। पर्रिकर जी का नाम आते ही हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर जी याद आने लगते है जिनका सरनेम खट्टर है जो हरियाणा में तब से फेमस है जब से वो मुख्यमंत्री बने है। हर किसान के मुंह से आप ये सरनेम दिन में दस बार सुना जा सकता है। क्यों इतना फेमस है ये मैं नहीं बताने का। खैर मनोहर जी हरियाणा के पहले मुख्यमंत्री बने जिन्होंने अपने नाम से ही योजना शुरू कर। दी। मैं इसे ग़लत भी नहीं मानता। अब ये जहाँ से आये है वहाँ से कोई भारत की आजादी के लिए नहीं लड़ा। पहले कभी राज भी नहीं आया। तो खुद के नाम का ही ऑप्शन बचता है। वैसे मनोहर नाम से योजना पे मैं भी गर्व कर सकता हूँ क्योंकि मेरे एक ताऊ का नाम भी मनोहर था जिनके परिवार के साथ हमारी खानदानी दुश्मनी है। दुश्मनी आपको गर्व करने से नहीं रोक सकती। बात तब की है जब मैं नादान और मासूम हुआ करता था। मैंने एक घर के आगे ” सांगवान निवास ” लिखा देखा। उस इंसान के लिए मेरा दिल सम्मान से भर गया जिसने अपने सरनेम वाले सब भाइयो बहनो के लिए एक पूरी कोठी बनवा दी। लोग आजकल अपने बाप का नाम नहीं रखते घर पे , उस भाई ने अपना सरनेम ही रख दिया। अपनी कॉम्यूनिटी से इतना प्यार। फिर जब उस घर में आना जाना हुआ तो पता लगा “सांगवान निवास ” में सांगवान साहब अपने भाई को अंदर नहीं आने देते। बहन को देख माथे पे शिकन आ जाती है। फिर समझ गर्व करना अलग बात है और मदद करना अलग। इनका आपस में कोई सम्बन्ध नहीं है। फिर भी मैं तो अपने भाइयो को यही सलाह दूंगा कि पिछली पीढ़ी वाली ग़लती न करे। वर्ना पता चले रात 12 बजे घंटी बजे। आप दरवाजा खोले तो एक आदमी ये कहते हुए मिले , “मायसेल्फ रविन्द्र शर्मा। शर्मा निवास का ऊपर वाला कमरा खाली कर दीजिये प्लीज ”

खैर बात प्रभु की हो रही थी ये जातिवाद कहाँ आ घुसा। ये जातिवाद हमने 50 साल पहले ख़त्म कर दिया था फिर जाने कहाँ कहाँ घुस आता है। हाँ तो प्रभु जी की काबिलियत की बात हो रही थी। प्रभु जी पुराने शिव सैनिक है 1996 ,1998 ,1999 और 2004 में चुनाव जीते। 2009 में कोंग्रेस वाले से हार गए। 2014 में हरियाणा की राज्यसभा सीट से संसद आ गए अरुण जेटली की तरह। 2016 में अभी आंध्र प्रदेश से राज्यसभा के सांसद है। अल्लाह ताला ने चाहा तो आने वाले सालो में आधे भारत से राज्य सभा में पहुँच ही जाएंगे।

इतने काबिल आदमी पर सवाल उठाते लोगो को शर्म नहीं आती। 2014 तक 120 साल तक कांग्रेस ने लूटा पर एक भी ट्रैन को ट्वीट करना नहीं सिखाया। सारी परेशानी प्रभु जी को आ रही है। अब ट्रैन को ट्वीट करना नहीं आता इसमें प्रभु की क्या ग़लती ? प्रभु तो ट्वीटर पर नजर गड़ाए थे। ट्रैन अब भी उस दकियानूसी ओल्ड फैशन्ड ट्रैक पर ही चल रही है। सरकार ट्वीटर पर ट्रैन चलाने की पूरी तैयारी में है। उसके बाद सब समस्याए ख़त्म हो जानी है। फिर जीवन और मरना तो उपरवाले के हाथ में है। उनकी आई हुई थी। ट्रैन में नहीं मरते तो कहीं और मरते। सबको मरना है एक दिन। सच्चाई से मुंह नहीं मोड़ना चाहिए। ट्रैन हादसा तो एक साधन मात्र है। मैं पूछना चाहता हूँ जो उस ट्रैन में नहीं थे वो क्या मरे नहीं गे कभी ? जवाब दीजिये।

प्रभु जी ने तो ट्रैन का स्तर इतना उठा दिया है कि ट्रैन का किराया प्लेन से भी ज्यादा करना पड़ा। सब जानते है जो महंगा होता है वो ज्यादा अच्छा होता है। दुनिया में भारत पहला देश बना जहाँ की ट्रैन वहां के हवाई जहाज से बेहतर है प्रभु की बदौलत। अभी सुनने में आ रहा है कि प्लेटफॉर्म टिकट 5 की बजाय २० रूपये का मिलने वाला है। बताओ जिस प्लेटफॉर्म का टिकट बीस रूपये का हो वो प्लेटफॉर्म कैसा होगा इसकी आप कल्पना कर सकते हो। देशद्रोही कोंग्रेसी कह रहे है रेल का घाटा प्रभु जी के आने के बाद लगातार बढ़ रहा है। अब ये अनपढ़ लोग सीए को नफा नुक्सान सिखाएंगे ? प्रभु इच्छा के बिना पत्ता नहीं हिल सकता पर प्रभु इच्छा के ऊपर भी एक इच्छा होती है बॉस की इच्छा। अगर बॉस को घाटा पसंद है जैसे बेबी को बेस पसंद है तो प्रभु क्या कर सकते है। वरना इस बात को जानने के लिए सीए करने की जरुरत नहीं है कि ट्रैन का किराया हवाई जहाज से ज्यादा करोगे तो लोग हवाई जहाज से सफर करेंगे बिना ये जाने कि भारत की रेल भारत के हवाई जहाज से ज्यादा है। अगर प्लेटफॉर्म टिकट 20 की करोगे तो लोग पास वाले स्टेशन की टिकट ले लेंगे जो पांच रूपये की आती है।

कुल मिलाकर सुरेश प्रभु जी की तारीफ जितनी की जाए उतनी कम है। एक बार मुझे ट्वीटर आ जाए फिर मैं भी किया करूँगा।

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