सरकार के दो और बड़े फैसले हंसी और विलाप टैक्स -Bodhi Sattva

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आज जो भी दिन दिनांक हो इसे सुदिन शुभ मान कर सरकार ने दो बड़े मार्मिक निर्णय लिए हैं….इसके लिए सरकार ने एक नए महकमें की स्थापना की है…जिसका नाम हंसी विलाप टैक्स विभाग रखा गया है.. आज और अभी से जो भी नर नारी बालक वृद्ध किसी भी स्थिति में रोता हुआ पाया जाएगा उस पर देश द्रोह का मुकदमा चलेगा, रोना अब एक राष्ट्र विरोधी कार्रवाई होगी… क्योंकि अब देश से शोक और दुख का नामोनिशान मिटा दिया गया है.. चप्पे-चप्पे पर राम राज्य की स्थापना हो गई है…

हर जिम्मेदार आदमी से सरकार की अपील है कि ऐसे रोने वालों की एक सूची बना कर तत्काल हंसी विलाप टैक्स विभाग के स्थानीय दफ्तर को सूचित करे…छुप-छुप कर रोने वालों और अपनी रुलाई दबाने वालों पर यह कर दोहरा लगाया जाएगा…आँख में आंसू आना एक गंभीर किस्म का राष्ट्रीय अधर्म माना जाएगा…जो लोग बात बेबात रोने लगते हैं उनको पटरी पर लाने के लिए एक धिक्कार विभाग बनाया जाएगा…क्योंकि सरकार राष्ट्र विरोधी कृत्यों को किसी भी स्थिति में सहन नहीं करने जा रही….

शहीदों की विधवाएँ या उनके परिजनों के विलाप भी संज्ञेय अपराध की सूची में दर्ज किए जाएँगे…सरकार का कहना है कि अगर देश के लिए सैनिक शहीद हुआ है तो रोने से शहादत का अपमान होता है, देश के गौरव पर कलंक लगता है…ऐसा करने वाले परिजन सच्चे राष्ट्रद्रोही माने जाएँगे…देश के तमाम राज मार्गों, हाइवे आदि पर होने वाली डकैतियों बलात्कारों पर उफ करने की कोई छूट न होगी…ऐसी शिकायतें करने पर रोने लग जाने को सरकार अब बर्दाश्त न करेगी….सरकार उन न्यूज चैनलों को भी नहीं माफ करेगी जो तकलीफ में पड़े लोगों से उनके बयान लेकर राष्ट्रीय स्तर पर उन्हें रोने का अवसर देती है…सरकार का कहना है कि न रोने वाले और गम को जब्त कर जाने वाले गंभीर किस्म के सहनशील देश भक्त लोगों को भी ये नामाकूल पत्रकार भावुक बना कर रुला देते हैं…सरकार आने वाले दिनों में पत्रकारों के लिए एक ऐसी प्रश्नावली बनाने जा रही है जिससे वे मुसीबत के मारों से रुलाने-धुलाने वाले प्रश्न न कर पाएँ..

जो लोग रोने वाली फिल्में बनाएँगे या लेख कहानी-उपन्यास या कविता लिखेंगे उनको पड़ोसी देश का एजेंट मान कर मुकदमा चलेगा…वे हास्य कलाकार जो हंसाते-हंसाते रुला देते हैं आज से अपराधी हैं…लेकिन उनको थोड़ी छूट मिलेगी क्योंकि उनके कारण सरकार के खजाने में हंसी पर लगने वाला कर आएगा…लेकिन उनको सरकार हिदायत देती है कि वे ऐसा हंसाएँ कि आदमी सीमित मात्रा में हंसे…हंसे लेकिन आँसू न निकले…क्योंकि किसी भी स्थिति में रोना राष्ट्र का अपमान है…

भूख, बेरोजगारी, बलात्कार के खिलाफ चित्कार भरी रुलाई पर साप्ताहिक फांसी का निर्णय होगा, इसके लिए फास्ट ट्रैक अदालतें हर मोहल्ले में लगेंगी, जिसके मुख्य न्याय कर्ता कभी भी न रोने वाले सरकार के ब्रह्मचारी या पत्नी घर परिवार त्यागी स्वयं सेवक हुआ करेंगे…मंहगाई, चोरी डकैती लूट दंगे उपद्रव आदि से दुखी हो कर रोने वालों पर परोक्ष कर का विधान भी होगा…उन्हें एकांत में मुंह या गला दबा कर चुप कराया जाएगा, इसमें स्थानीय स्वयं सेवक गंभीर भूमिका निभाएँगे…

सरकार का मानना है कि उसके प्रधान के आंसू आंसू नहीं देश के लिए अर्पित जलांजलि थे… इसलिए उस रुलाई से प्रेरित होने या उसे सामने रख कर बचने की कोशिश बेमानी होगी…

दूसरा नया विधान यह है कि किसी भी तरह हंसने मुस्कराने, गाने गुनगुनाने, खुश होने पर आह्लाद कर यानी हंसी टैक्स लगेगा….यह टैक्स वसूलने के लिए कण-कण में कैमरे लगाए जाएँगे और घर-घर जा कर यह टैक्स उगाहा अथवा वसूला जाएगा….अब कोई बच न पाएगा…कोई भी खुश आदमी औरत, बच्चा बूढ़ा देश का टैक्स न हड़प पाएगा…

हंसने की गहराई, ठहाकों की ध्वनि की तिब्रता पर निर्भर करेगी…दांत दिखाने वाली हंसी…मंद मुस्कान आदि पर अलग तरह के कर लगेंगे…
वह हंसी जिसमें हंसने वाला दुहरा हो जाता है उस पर दुहरा कर लगेगा…हंसने पर पेट दर्द हो जाए उस हंसी पर तिहरा कर लगेगा….साथ ही देश द्रोह का मुकदमा भी चलेगा..क्योंकि हंसने पर आंसू क्यों आए…..हंस-हंस कर रोता हुआ आदमी या ऐसी स्थिति राष्ट्र भक्ति को संदेह के घेरे में लाती है….

जन्म दिन पर गाना गाने, विवाहों पर बधाई देने, सुहागरात में खिलखिलाने, मुंडन पर मौज करने, हनीमून पर हर्षित होने पर टैक्स का विस्तार संभव है…यहाँ तक कि अगर देश मैच जीत जाए तो उस दशा में पटाखे फोड़ने या खुश होने पर तीन से सात गुना अह्लाद कर वसूला जाएगा…

वे लोग जो न हंस रहे हैं या न रो रहे हैं उनकी मनोदशा मापने के लिए एक विशेष पैनल होगा जो यह तय करेगा कि ऐसे लोगों से कर कैसे वसूला जाए…उदासी को कर के दायरे में लाने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है…ऐसे मनहूस लोग जो कि केवल मौन रहते हैं, जिनकी आँखें सूनी हो गई हैं, जो अवाक् या शब्द हीन हो गए हैं उनको भी सरकार किसी स्थिति में छूट देने के मूड में नहीं है….जिन आँखों में सदैव एक चमक भरी मुस्कान बसती है सरकार उनको सर्वकालिक मुस्कान कर वसूलेगी..

सरकार ने अपने तमाम कण-कण वासी सेवकों से अनुरोध किया है कि वे ऐसे रोने और हंसने वालों की एक सम्पूर्ण सूची के साथ ही उदास, मौनी, और भावहीन हो गए लोगों को अलग-अलग चिन्हित करके सरकार को उनके गुप्त नंबरों पर सूचित करके सरकार को महाबलवान बनाएँ जिससे सरकार अपने ओरिजनल रामराज्य का सही-सही आंकलन कर सके और कलियुग रहने तक ऐसा अपूर्व राम राज्य या घनश्याम राज्य रहे..

नोट- सरकार हाल फिलहाल में कुछ और बड़े फैसले लेने वाली है, उसके विवरण आगे पेश किए.. जाएँगे…ऐसा लेख लिखने वाले लेखक सरकार के पेशवा होंगे..

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