समस्या बहुजनों की है. SC और OBC को मिलकर सोचना होगा – Dilip Mandal

 

Dilip Mandal

ओबीसी पर आरोप है कि वह ब्राह्मणवाद की पालकी ढोता है। हो सकता है कि आप ठीक बोल रहे हों। लेकिन, आजादी के बाद से 1990 तक और उसके बाद भी, दलित जब मोटे तौर पर कांग्रेस को वोट देते थे और यूपी के बाहर कई राज्यों में आज भी उसे ही वोट देते हैं, तो वे किसकी पालकी ढोते हैं?

दलितों ने बाबा साहेब की पार्टी को ही कब अपनाया?

पंजाब का लगभग तीस प्रतिशत आबादी वाला दलित किसे वोट देता है और किसकी पालकी ढोता है? लगभग 25 प्रतिशत आबादी वाला बंगाल का दलित और इससे कुछ ही कम आबादी वाला हरियाणा, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश का दलित किसकी पालकी ढोता है? ओड़िसा का दलित, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ का दलित किसकी पालकी अपने सिर पर उठाता है। यहाँ के दलितों ने बीएसपी को अपनाया होता, तो केंद्र में सत्ता के पास होती बीएसपी?

ओबीसी और दलित एक जैसी राजनीतिक ग़लतियाँ करते रहे हैं।
किसी एक को मत कोसिए।

राजनीति से परे देखें, तो दलितों ने बौद्ध धर्म को घटता हुआ धर्म क्यों बना रखा है. इस धर्मांतरण से तो आरक्षण भी नहीं जाता. वह मंदिर जाने के अधिकार के लिए क्यों छटपटा रहा है? कई राज्यों में चल रहे मंदिर प्रवेश के आंदोलन की वैचारिकी क्या है? बाबा साहेब तो यह आंदोलन छोड़ चुके थे.

आपको क्या लगता है कि कांवड़ सिर्फ ओबीसी ढो रहा है? दलितों की समान हिस्सेदारी है ब्राह्मणवाद की पालकी ढोने में. कांवड़ ढोने के लिए कोई जबर्दस्ती नहीं कर रहा है. यह सहमति से लागू हो रहा ब्राह्मणवादी वर्चस्व है.

समस्या बहुजनों की है. SC और OBC को मिलकर सोचना होगा. एक दूसरे को कोसने से कुछ हासिल नहीं होगा?

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