जो रोहित ने नहीं कहा – Apoorvanand

Rohit

 

“मैं औपचारिकताएं लिखना भूल गया। अपनी ज़िंदगी ख़त्म करने के मेरे इस फैसले के लिए कोई और ज़िम्मेदार नहीं है। मुझे किसी ने उकसाया भी नहीं है, न ही अपने लफ़्ज़ों से और न ही हरक़तों से। यह मेरा फैसला है और इसके लिए पूरी तरह से मैं ज़िम्मेदार हूं। मेरे दोस्तों और दुश्मनों को, मेरे जाने के बाद परेशान न किया जाए।”

रविवार को अपने जीवन का अंत करने से पहले, रोहित वेमुला ने अपनी चिट्ठी का यह अंत लिखा था। इस मामले के बारे में जानकारी हासिल करने वाले सभी लोग, अब तक अच्छी तरह जान चुके होंगे कि वेमुला, हैदराबाद विश्वविद्यालय द्वारा निलम्बित किए गए, उन 5 छात्रों में से एक थे, जिनका कथित तौर पर भारतीय जनता पार्टी के छात्र संगठन, एबीवीपी से विवाद हुआ था। मामला आगे तब बढ़ गया, जब भाजपा के श्रम एवम् रोजगार राज्य मंत्री, बंडारू दत्तात्रेय ने इस मामले में अपनी निजी रुचि को ज़ाहिर करते हुए, मानव संसाधन एवम् विकास मंत्रालय को एक पत्र भेजा।

वकीलों के निर्मम हाथों में जा कर, इस सुसाइड नोट का इस्तेमाल, दरअसल हैदराबाद विश्वविद्यालय के अधिकारियों, एबीवीपी और दत्तात्रेय को इस ख़ुदकुशी के लिए वेमुला को उकसाने के आरोपों से बचाने के लिए होगा। इसको राष्ट्रवादी नेता, बड़े गर्व से, भारतीय दलितों की सहिष्णुता के प्रमाण के तौर पर सजाएंगे, जो कि अपनी उत्पीड़न से गई जान के लिए भी किसी पर आरोप नहीं लगाते।

लेकिन अपनी मृत्यु के क्षणों में भी उस युवक की दरियादिली के बावजूद, हमको इस सच से मुंह नहीं चुराना चाहिए, कि रोहिथ की मौत, हमारी कायरता की वजह से हुई। हमारे साथी शिक्षाविदों और विश्वविद्यालय के अधिकारियों की कायरता, जिसके कारण वह सत्ता के सामने झुक गए और वेमुला और उनके साथियों को छात्रावास से ही नहीं निकाल दिया गया, बल्कि पुस्तकालय और परिसर में प्रवेश करने से भी प्रतिबंधित कर दिया गया। हालांकि विश्वविद्यालय द्वारा बनाई गई, अनुशासन कमेटी ने वेमुला और उनके साथियों के खिलाफ लगाए गए इन आरोपों में कोई दम नहीं पाया था कि उन्होंने एबीवीपी के एक सदस्य पर हमला कर के, उसे ज़ख्मी कर दिया, प्रशासन ने इस रिपोर्ट को पलट दिया और अम्बेडकर स्टेंट्स एसोसिएशन के 5 छात्रों को निष्कासित कर दिया।

जो रोहित ने नहीं कहा

अपने नोट में वेमुला, उन घटनाओं का उल्लेख नहीं करता, जिनके कारण उसने अपनी जान ले लेने का निर्णय किया। वह यह नहीं कहता कि उसके समूह ने याक़ूब मेमन की फांसी का विरोध किया था, वह यह भी नहीं कहता कि उसने उत्तर प्रदेश में हुए साम्प्रदायिक दंगों पर बने वृत्तचित्र, मुज़फ्फरनगर बाकी है की स्क्रीनिंग का आयोजन करवाया था। उसने यह भी नहीं लिखा कि इन कारणों से ही वह एबीवीपी के निशाने पर आया था और बंडारू दत्तात्रेय, स्मृति ईरानी को इन ‘राष्ट्रविरोधी तत्वों’ के खिलाफ कार्रवाई की चिट्ठी लिखने को मजबूर हुए थे। यह चिट्ठी यह भी नहीं बताती कि वह पिछले 2 हफ्तों से खुले आसमान के नीचे सो रहा था।

उसकी जगह वह लिखता है, “मैं इस समय आहत नहीं हूं, दुखी भी नहीं। मैं सिर्फ खाली हूं। अपने बारे में मुझे कोई परवाह नहीं है। यह दयनीय है। और इसीलिए मैं ऐसा कर रहा हूं।” वह यह कहने में असफल हो गया कि वह एक अपने आप को उस दुनिया में दयनीय पाता था, जिसे वह समझने की कोशिश में था, लेकिन जिसे उसे प्रेम, दर्द, जीवन और मृत्यु जैसे चीज़ों के प्रति किसी तरह की हड़बड़ी नहीं थी, जिनका रोहित मतलब जानना चाहता था। वह ऐसी दुनिया से निराश हो जाता है, जहां, “मनुष्य की कीमत उसकी वर्तमान की पहचान और भविष्य की संभावनाओं तक महदूद हो गई है। एक वोट, एक संख्या, एक चीज़, लेकिन कभी एक मस्तिष्क के तौर पर नहीं।”

वेमुला की इच्छा थी कि मनुष्यों से मस्तिष्कों की तरह बर्ताव किया जाए। “जैसे कि वह सितारों की धूल से बनी अनमोल चीज़ हो, हर क्षेत्र में…चाहें शिक्षा या सड़क या जीवन या फिर मौत..”

नए साथियों की तलाश

वेमुला की इच्छा एक विज्ञान लेखक बनने की थी और वह चाहते थे कि शब्दों के ब्रह्मांड का हिस्सा बनें। वह अपनी इस तात्कालिक पहचान से संतुष्ट भर नहीं थे। वह सिर्फ दलित के तौर पर नहीं मरना चाहते थे। वह इस से परे जाना चाहते थे, वह अनंत की, सितारों की यात्रा करना चाहते थे। हां, यह भी सच है कि वह इन्हीं सीमाओं से परे जाने की कोशिश करते हुए ही जान गंवा बैठे। अम्बेडकर स्टूडेंट्स एसोसिएशन के सदस्य के तौर पर उन्होंने हाशिए पर पड़े मुस्लिमों का समर्थन कर के, राष्ट्रीय जनमत को चुनौती दी थी। यह उनके छोटे से जीवन का अंतिम काम था, कि नई तरह की एकजुटता बनाई जाए। लेकिन दुनिया उनकी गति के साथ कदम नहीं मिला सकी और उन्होंने इसकी कीमत अपने जीवन से चुकाई।

पिछले कुछ हफ्तों से हैदराबाद विश्वविद्यालय में चल रहा नाटकीय घटनाक्रम नया नहीं है। इसके तत्व, देश भर के तमाम शिक्षण संस्थानों में देखे जा सकते हैं। भारतीय विश्वविद्यालय, वेमुला जैसे युवा स्वप्नदर्शियों के लिए बिल्कुल भी कोई आश्रय नहीं देने वाले हैं। वह अब ऐसे लोगों का घेट्टो हैं, जो आत्मसेवी हैं और अपनी सुविधाओं को साध रहे हैं, जो अपने उस कर्तव्य को भूल चुके हैं, जो कि युवाओं को सारे बंधनों को तोड़ने की हिम्मत देने, कुछ भी करने और उनके साथ खड़ा होने का है, भले ही समाज उनको ख़तरनाक़ मानता रहे।

एक ऐसी महात्वाकांक्षी जमात को लेकर बड़ा शोर मच रहा है, जो आजकल की राजनीति को लेकर बहुत अधीर है। क्या वेमुला एक महात्वाकांक्षी युवा मस्तिष्क नहीं था? अगर थे, तो उनको अकेला और अधूरा क्यों महसूस करना पड़ा….?

Courtesy: Scroll

Translated by: Mayank Saxena

Read: Rohith Vemula wanted to reach for the stars, but his bid to break barriers killed him

 

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One thought on “जो रोहित ने नहीं कहा – Apoorvanand

  1. Going through the POIGNANT LAST LETTER of ROHIT VEMULA before he committed suicide &that incidentally being the very first time he wrote;on his own PERSONAL THOUGHTS, views&IDEAS about our DIVIDING, STRATIFYING&SEGREGATING society that CONTINUES EVEN TODAY to take SADISTIC PLEASURE in CRITICISING,DENOUNCING&PILLORYING even the DEAD(if one goes by some COMMENTS by obviously those who do not belong to the SAME caste&CLASS to which ROHIT VEMULA had belonged!),one is left AGHAST&almost with a belief that we as a society are TRULY HEADED towards what the BRITISHERS used to predict at the time of granting us our Independence that”INDIA without the STRONG autocratic Rule of the British to keep it UNITED&BOUND,will eventually BALKANISE&DISINTEGRATE”!
    Even if TRAGEDY as SOLEMN as this one can’t make our EDUCATED INTELLIGENTSIA to COME up with an UNBIASED,NEUTRAL&FORTHRIGHT condemnation of ALL those who were DIRECTLY Responsible for causing it,surely this BRITISHERS PREDICTION may BECOME REAL?

    Evn in this Day&Age(68yrs aftr INDPENDENCE)no JUSTICEfr DALITS?!
    Four booked in Hyderabad student suicide case-Hindu http://www.thehindu.com/news/cities/Hyderabad/article8120068.ece

    4booked fr Hyderabad studnt suicide-Hindu
    Evn in ths Day&Age(68yrs aftr INDPENDENCE)no JUSTICEfr DALITS?!
    c FBpost

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