दादरी को दोबारा सुलगाने की कोशिश, इस बार मीडिया की लापरवाही उजागर हुई – शाहनवाज मलिक

 

उदय सिंह के मुताबिक सभी बच्चों के बयान दर्ज किए गए लेकिन टॉर्चर, धर्मांतरण या बीफ खाने जैसा बयान किसी ने नहीं दिया। छापेमारी की खबर मिलने के बाद सभी बच्चों के अभिभावकों से संपर्क किया गया। इन्होंने बाकायदा हलफनामा देकर कहा कि वे गरीब हैं। अपने बच्चों की पढ़ाई-लिखाई का खर्च नहीं उठा सकते। हमने अपनी मर्ज़ी से बच्चों को संस्था के हवाले किया है। बावजूद इसके 4 जनवरी को मुकदमा कायम करके तफ्तीश की जा रही है। cropped-hille-le-copy

नई दिल्ली। बीफ की फर्ज़ी अफवाह से बदनाम दादरी इलाके को दोबारा सुलगाने की कोशिश की गई है। इस बार निशाने पर बिसरख गांव की ईसाई संस्था है। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि मासूम बच्चों को जबरन बीफ खिलाने के अलावा संस्था उनपर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाती थी। वहीं पुलिस ने मीडिया रिपोर्ट्स को फर्ज़ी करार देते हुए इस शर्मनाक बताया है। नोएडा पुलिस को यह भी डर है कि एक तरफा रिपोर्ट को आधार बनाकर इलाके का अमन बिगाड़ने की कोशिश की जा सकती है।

हिन्दुस्तान टाइम्स में छपी रिपोर्ट के मुताबिक ईसाई संस्था के शेल्टर होम में बच्चों के हाथ बांधकर सीलिंग फैन से टांग दिया जाता था। बुरी तरह पिटाई के अलावा उन्हें जबरन बाइबिल पढ़वाया जाता था। उन्हें बीफ खाने और ईसाई धर्म कुबूल करने के लिए बाध्य तक किया जाता था। मगर पुलिस की तफ्तीश में सभी आरोप फर्ज़ी निकले। जांच अफसर उदय सिंह ने इसे एक औरत की आपसी खुन्नस का नतीजा बताया है।

उदय सिंह ने बताया कि उन्होंने चाइल्ड लाइन संस्था के शशिकांत पांडेय ने शिकायत की थी। 29 दिसंबर को चाइल्ड लाइन, फरीदाबाद की संस्था FXB सुरक्षा और बिसरख पुलिस की संयुक्त टीम ने हैबतपुर गांव के शेल्टर होम में छापेमारी की। फिर इमैनुअल सेवा ग्रुप के शेल्टर होम पर रेड डालकर 7 बच्चों को रेस्क्यू किया गया। इन बच्चों में 5 ईसाई, एक पंजाबी और एक दक्षिण भारत का है।

उदय सिंह के मुताबिक सभी बच्चों के बयान दर्ज किए गए लेकिन टॉर्चर, धर्मांतरण या बीफ खाने जैसा बयान किसी ने नहीं दिया। छापेमारी की खबर मिलने के बाद सभी बच्चों के अभिभावकों से संपर्क किया गया। इन्होंने बाकायदा हलफनामा देकर कहा कि वे गरीब हैं। अपने बच्चों की पढ़ाई-लिखाई का खर्च नहीं उठा सकते। हमने अपनी मर्ज़ी से बच्चों को संस्था के हवाले किया है। बावजूद इसके 4 जनवरी को मुकदमा कायम करके तफ्तीश की जा रही है।

पुलिस के मुताबिक चाइल्ड लाइन संस्था को इस शेल्टर होम की जानकारी बिसरख की एक महिला नूतन से मिली थी। नूतन का आरोप था कि उनका बेटे संस्था के कब्जे में है। इसके बाद नूतन की शिकायत पर संस्था के मेरठ स्थित शेल्टर होम में छापेमारी की गई। यहां से 23 बच्चों को रेस्क्यू हुए लेकिन नूतन का बेटा नहीं मिला।

हैरानी की बात यह कि मेरठ पुलिस ने इस मामले में एफआईआर तक करना मुनासिब नहीं समझा। बिसरख मामले के इनवेस्टिगेशन ऑफिसर के मुताबिक सभी 23 बच्चों के स्टेटमेंट में कोई भी आपत्तिजनक बयान सामने नहीं आया है। मेरठ पुलिस ने भी सभी बच्चों बच्चों के घरवालों से बात की। उन्होंने माना कि वे अपनी मर्ज़ी से बच्चों को शेल्टर होम में छोड़कर गए हैं।

बीफ खाने और धर्मांतरण वाले सवाल अफसर से लेकर छापेमारी करने वाली संस्था के अधिकारियों तक ने नकार दी है।

गौतमबुद्ध नगर के एसपी क्राइम विश्वजीत श्रीवास्तव ने साफ-साफ कहा कि अभी तक की तफ्तीश में ऐसा कुछ नहीं निकला है।

बिसरख थाने के एसएचओ अश्वीनी ने दावा किया कि बच्चों या उनके घरवालों ने ऐसा कोई बयान दर्ज नहीं करवाया है।

इस केस के आईओ उदय सिंह ने कहा कि फर्ज़ी जानकारी के सहारे अफवाह फैलाई जा रही है। शेल्टर होम के तीन लोगों से पूछताछ के बाद उन्हें छोड़ दिया गया है।

छापेमारी में शामिल संस्था FXB सुरक्षा के प्रोग्राम मैनेजर सत्यप्रकाश ने भी बच्चों से पूछताछ की है। उन्होंने कहा कि बीफ या धर्मांतरण का आरोप किसी ने नहीं लगाया। बाइबिल पढ़ने की बात बच्चे ने जरूर कही है।

कैसे फैली सनसनीख़ेज ख़बर?

बिसरख पुलिस को तफ्तीश में पता चला है कि शिकायतकर्ता महिला नूतन और उसके पति इसी संस्था के लिए काम करते थे। नूतन अपने बच्चों का लालन-पालन भी इसी संस्था के सहारे कर रही थी। मगर सैलरी को लेकर संस्था और इस नूतन के बीच अनबन हो गई। नूतन को 5 हजार रुपए प्रतिमाह मिलते थे जबकि वह 10 हज़ार की मांग कर रही थी।

पुलिस को आशंका है कि अपनी मांग मनवाने के लिए नूतन ने ब्लैकमेलिंग शुरू कर दी थी। आईओ उदय सिंह इस एंगल से भी जांच कर रहे हैं। पुलिस पूछताछ में नूतन ने बताया है कि वह संस्था के लिए देशभर में प्रचार करती रही हैं।

हिन्दुस्तान टाइम्स में जिन दो बच्चों के बयान के आधार पर रिपोर्ट तैयार की गई है, वे इसी महिला के बताए जाते हैं। बिसरख पुलिस के मुताबिक महिला के बच्चे बिसरख और मेरठ स्थित शेल्टर होम में नहीं थे। नूतन के बच्चे संस्था के कब्जे में थे या नहीं, यह वही बेहतर बता सकती हैं।

एचटी में छपी ख़बर का लिंक

http://www.hindustantimes.com/noida/greater-noida-shelter-kids-starved-forcibly-converted-to-christianity/story-msJFyEoZaffHcjNHA3I3UM.html

8860221098– सत्यप्रकाश, प्रोग्राम मैनेजर एफएक्सबी सुरक्षा

9958459572– अश्वीनी, एसएचओ, बिसरख

9654667333– उदय सिंह, इस केस के आईओ

8527222012– विश्वजीत श्रीवास्तव, एसपी क्राइम, नोएडा

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