गुंडागर्दी को देशभक्ति मत कहिए… – रवीश कुमार

ravish-abused-on-twitter_650x1120_61437985016आज सुबह व्हॉट्सऐप, मैसेंजर और ट्विटर पर कुछ लोगों ने एक प्लेट भेजा, जिस पर मेरा भी नाम लिखा है। मेरे अलावा कई और लोगों के नाम लिखे हैं। इस संदर्भ में लिखा गया है कि हम लोग उन लोगों में शामिल हैं, जिन्होंने याकूब मेमन की फांसी की माफी के लिए राष्ट्रपति को लिखा है। अव्वल तो मैंने ऐसी कोई चिट्ठी नहीं लिखी है और लिखी भी होती तो मैं नहीं मानता, यह कोई देशद्रोह है। मगर वे लोग कौन हैं, जो किसी के बारे में देशद्रोही होने की अफवाह फैला देते हैं। ऐसा करते हुए वे कौन सी अदालत, कानून और देश का सम्मान कर रहे होते हैं। क्या अफवाह फैलाना भी देशभक्ति है।

किसी को इन देशभक्तों का भी पता लगाना चाहिए। ये देश के लिए कौन-सा काम करते हैं। इनका नागरिक आचरण क्या है। आम तौर पर ये लोग किसी पार्टी के भ्रष्टाचारों पर पर्दा डालते रहते हैं। ऑनलाइन दुनिया में एक दल के लिए लड़ते रहते हैं। कई दलों के पास अब ऐसी ऑनलाइन सेना हो गई है। इनकी प्रोफाइल दल विशेष की पहचान चिह्नों से सजी होती हैं। किसी में नारे होते हैं तो किसी में नेता तो किसी में धार्मिक प्रतीक। क्या हमारे लोकतंत्र ने इन्हें ठेका दे रखा है कि वे देशद्रोहियों की पहचान करें, उनकी टाइमलाइन पर हमला कर आतंकित करने का प्रयास करें।

सार्वजनिक जीवन में तरह-तरह के सवाल करने से हमारी नागरिकता निखरती है। क्यों ज़रूरी हो कि सारे एक ही तरह से सोचें। क्या कोई अलग सोच रखे तो उसके खिलाफ अफवाह फैलाई जाए और आक्रामक लफ़्ज़ों का इस्तेमाल हो। अब आप पाठकों को इसके खिलाफ बोलना चाहिए। अगर आपको यह सामान्य लगता है तो समस्या आपके साथ भी है और इसके शिकार आप भी होंगे। एक दिन आपके खिलाफ भी व्हॉट्सऐप पर संदेश घूमेगा और ज़हर फैलेगा, क्योंकि इस खेल के नियम वही तय करते हैं, जो किसी दल के समर्थक होते हैं, जिनके पास संसाधन और कुतर्क होते हैं। पत्रकार निखिल वाघले ने ट्वीट भी किया है, “अब इस देश में कोई बात कहनी हो तो लोगों की भीड़ के साथ ही कहनी पड़ेगी, वर्ना दूसरी भीड़ कुचल देगी…” आप सामान्य पाठकों को सोचना चाहिए। आप जब भी कहेंगे, अकेले ही होंगे।

alok-story_062915021551पूरी दुनिया में ऑनलाइन गुंडागर्दी एक खतरनाक प्रवृत्ति के रूप में उभर रही है। ये वे लोग हैं, जो स्कूलों में ‘बुली’बनकर आपके मासूम बच्चों को जीवन भर के लिए आतंकित कर देते हैं, मोहल्ले के चौक पर खड़े होकर किसी लड़की के बाहर निकलने की तमाम संभावनाओं को खत्म करते रहते हैं और सामाजिक प्रतिष्ठा को ध्वस्त करने का भय दिखाकर ब्लैकमेल करते हैं। आपने ‘मसान’ फिल्म में देखा ही होगा कि कैसे वह क्रूर थानेदार फोन से रिकॉर्ड कर देवी और उसके बाप की ज़िन्दगी को खत्म कर देता है। उससे पहले देवी के प्रेमी दोस्त को मौके पर ही मार देता है। यह प्रवृत्ति हत्यारों की है, इसलिए सतर्क रहिए।

बेशक आप किसी भी पार्टी को पसंद करते हों, लेकिन उसके भीतर भी तो सही-गलत को लेकर बहस होती है। चार नेताओं की अलग-अलग लाइनें होती हैं, इसलिए आपको इस प्रवृत्ति का विरोध करना चाहिए। याद रखिएगा, इनका गैंग बढ़ेगा तो एक दिन आप भी फंसेंगे। इसलिए अगर आपकी टाइमलाइन पर आपका कोई भी दोस्त ऐसा कर रहा हो तो उसे चेता दीजिए। उससे नाता तोड़ लीजिए। अपनी पार्टी के नेता को लिखिए कि यह समर्थक रहेगा तो हम आपके समर्थक नहीं रह पाएंगे। क्या आप वैसी पार्टी का समर्थन करना चाहेंगे, जहां इस तरह के ऑनलाइन गुंडे हों। सवाल करना मुखालफत नहीं है। हर दल में ऐसे गुंडे भर गए हैं। इसके कारण ऑनलाइन की दुनिया अब नागरिकों की दुनिया रह ही नहीं जाएगी।

shruti_2ऑनलाइन गुंडागर्दी सिर्फ फांसी, धर्म या किसी नेता के प्रति भक्ति के संदर्भ में नहीं होती है। फिल्म कलाकार अनुष्का शर्मा ने ट्वीट किया है कि वह ग़ैर-ज़िम्मेदार बातें करने वाले या किसी की प्रतिष्ठा को नुकसान करने वालों को ब्लॉक कर देंगी। मोनिका लेविंस्की का टेड पर दिया गया भाषण भी एक बार उठाकर पढ़ लीजिए। मोनिका लेविंस्की ऑनलाइन गुंडागर्दी के खिलाफ काम कर ही लंदन की एक संस्था से जुड़ गई हैं। उनका प्रण है कि अब वह किसी और को इस गुंडागर्दी का शिकार नहीं होने देंगी। फेसबुक पर पूर्व संपादक शंभुनाथ शुक्ल के पेज पर जाकर देखिए। आए दिन वह ऐसी प्रवृत्ति से परेशान होते हैं और इनसे लड़ने की प्रतिज्ञा करते रहते हैं। कुछ भी खुलकर लिखना मुश्किल हो गया है। अब आपको समझ आ ही गया होगा कि संतुलन और ‘is equal to’ कुछ और नहीं, बल्कि चुप कराने की तरकीब है। आप बोलेंगे तो हम भी आपके बारे में बोलेंगे। क्या किसी भी नागरिक समाज को यह मंज़ूर होना चाहिए।

इन तत्वों को नज़रअंदाज़ करने की सलाह बिल्कुल ऐसी है कि आप इन गुंडों को स्वीकार कर लीजिए। ध्यान मत दीजिए। सवाल है कि ध्यान क्यों न दें। प्रधानमंत्री के नाम पर भक्ति करने वालों का उत्पात कई लोगों ने झेला है। प्रधानमंत्री को लेकर जब यह सब शुरू हुआ तो वह इस ख़तरे को समझ गए। बाकायदा सार्वजनिक चेतावनी दी, लेकिन बाद में यह भी खुलासा हुआ कि जिन लोगों को बुलाकर यह चेतावनी दी, उनमें से कई लोग खुद ऐसा काम करते हैं। इसीलिए मैंने कहा कि अपने आसपास के ऐसे मित्रों या अनुचरों पर निगाह रखिए, जो ऑनलाइन गुंडागर्दी करता है। ये लोग सार्वजनिक जीवन के शिष्टाचार को तोड़ रहे हैं।

मौजूदा संदर्भ याकूब मेमन की फांसी की सज़ा के विरोध का है। जब तक सज़ा के खिलाफ तमाम कानूनी विकल्प हैं, उनका इस्तेमाल देशद्रोह कैसे हो गया। सवाल उठाने और समीक्षा की मांग करने वाले में तो हिन्दू, मुस्लिम, सिख और ईसाई भी हैं। अदालत ने तो नहीं कहा कि कोई ऐसा कर देशद्रोह का काम कर रहे हैं। अगर इस मामले में अदालत का फैसला ही सर्वोच्च होता तो फिर राज्यपाल और राष्ट्रपति के पास पुनर्विचार के प्रावधान क्यों होते। क्या ये लोग संविधान निर्माताओं को भी देशद्रोही घोषित कर देंगे।

याकूब मेमन का मामला आते ही वे लोग, जो व्यापमं से लेकर तमाम तरह के भ्रष्टाचार के आरोपों के कारण ऑनलाइन दुनिया से भागे हुए थे, लौट आए हैं। खुद धर्म की आड़ लेते हैं और दूसरे को धर्म के नाम पर डराते हैं, क्योंकि अंतिम नैतिक बल इन्हें धर्म से ही मिलता है। वे उस सामूहिकता का नाजायज़ लाभ उठाते हैं, जो धर्म के नाम पर अपने आप बन जाती है या जिसके बन जाने का मिथक होता है। फिल्मों में आपने दादा टाइप के कई किरदार देखें होंगे, जो सौ नाजायज़ काम करेगा, लेकिन भक्ति भी करेगा। इससे वह समाज में मान्यता हासिल करने का कमज़ोर प्रयास करता है। अगर ऑनलाइन गुंडागर्दी करने वालों की चली तो पूरा देश देशद्रोही हो जाएगा।

neha_dhupia_twitter_thumbna1यह भी सही है कि कुछ लोगों ने याकूब मेमन के मामले को धार्मिकता से जोड़कर काफी नुकसान किया है, गलत काम किया है। फांसी के आंकड़े भी इसकी पुष्टि करते हैं कि फैसले का संबंध धर्म से नहीं है। लेकिन क्या इस बात का वे लोग खुराक की तरह इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं, जो हमेशा इसी फिराक में रहते हैं कि कोई चारा मिले नहीं कि उसकी चर्चा शहर भर में फैला दो। क्या आपने इन्हें यह कहते सुना कि वे धर्म से जोड़ने का विरोध तो करते हैं, मगर फांसी की सज़ा का भी विरोध करते हैं। याकूब का मामला मुसलमान होने का मामला ही नहीं हैं। पुनर्विचार एक संवैधानिक अधिकार है। नए तथ्य आते हैं तो उसे नए सिरे से देखने का विवेक और अधिकार अदालत के पास है।

90 देशों में फांसी की सज़ा का प्रावधान नहीं हैं। क्या वहां यह तय करते हुए आतंकवाद और जघन्य अपराधों का मामला नहीं आया होगा। बर्बरता के आधार पर फांसी की सज़ा का करोड़ों लोग विरोध करते हैं। आतंकवाद एक बड़ी चुनौती है। हमने कई आतंकवादियों को फांसी पर लटकाया है, पर क्या उससे आतंकवाद ख़त्म हो गया। सज़ा का कौन-सा मकसद पूरा हुआ। क्या इंसाफ का यही अंतिम मकसद है, जिसे लेकर राष्ट्रभक्ति उमड़ आती है। इनके हमलों से जो परिवार बर्बाद हुए, उनके लिए ये ऑनलाइन देशभक्त क्या करते हैं। कोई पार्टी वाला जाता है उनका हाल पूछने।

फांसी से आतंकवाद खत्म होता तो आज दुनिया से आतंकवाद मिट गया होता। आतंकवाद क्यों और कैसे पनपता है, उसे लेकर भोले मत बनिए। उन क्रूर राजनीतिक सच्चाइयों का सामना कीजिए। अगर इसका कारण धर्म होता और फांसी से हल हो जाता तो गुरुदासपुर आतंकी हमला ही न होता। उनके हमले से धार्मिक मकसद नहीं, राजनीतिक मकसद ही पूरा होता होगा। धर्म तो खुराक है, ताकि एक खास किस्म की झूठी सामूहिक चेतना भड़काई जा सके। जो लोग इस बहस में कूदे हैं, उनकी सोच और समझ धार्मिक पहचान से आगे नहीं जाती है। वे कब पाकिस्तान को आतंकी बता देते हैं और कब उससे हाथ मिलाकर कूटनीतिक इतिहास रच देते हैं, ऐसा लगता है कि सब कुछ टू-इन-वन रेडियो जैसा है। मन किया तो कैसेट बजाया, मन किया तो रेडियो। मन किया तो हम देशभक्त, मन किया तो आप देशद्रोही।

 

यह लेख http://khabar.ndtv.com/news/blogs/ravish-kumar-writes-about-online-goons-and-the-patriotism-1200971 से लिया गया है।

Ravishवीश कुमार वरिष्ठ हिंदी पत्रकार हैं, सम्प्रति एनडीटीवी इंडिया में प्राइम टाइम के एंकर के रूप में देश भर में लोकप्रिय हैं। सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं और अपनी बात को अपनी तरह से कहने में संकोच न करने के लिए पसंद किए जाते हैं।

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52 thoughts on “गुंडागर्दी को देशभक्ति मत कहिए… – रवीश कुमार

  1. However I agree that online bullying is absolutely wrong and immoral but this article is so biased only towards modi-bhakt victims. There is no mention of abusive AAP supporters and congress supporters abusive languages…
    Next point is about yaqub memon’s hanging… Man! It could not be more stupid, seriously? People forget that just like they have so-called right to express their opinion on some issue, we also have the right to criticize you… It doesn’t work one way. However in this context as well, language should be taken care of. It is usual that when people run out of facts or logic or stuff-to-say, they turn to abusing. You can declare yourself a winner at this point….

  2. Bhulna mat Ravish ji, jab aise hi sare log Nirbhaya kaand ke baad sabhi rape accused ko faasi pe chadha dene ki baat kar rahe the, tab aaplogo ne bhi khub sath diya. Kabhi soche the ki sare rape accused doshi nahi hote?? Desh me 77% rape case bhi false hote hai.
    And jab aise desh drohi jinhone 260 masooom logo ke maut ko anjaam diya ko faasi ho rahi hai tab aapki sympathy jaag rahi hai??? Ye doglapan nahi to aur kya hai??

    • How about sadhvi pragya. On what behalf se has been released and the accused of gujrat riots are free. Stupid decision of the court. I condemn the killing by menon team but who will condemn ajmer, malegaon and gujrat, Muzaffarnagar nagar, etc…

  3. One thing that i must say is most pathetic is that how some one can be a nationalist or anti nationalist just by supporting a political party or political ideologies. Furthermore, according to them sedition charges needs to be filed against anyone who say anything about their godfathers inspite of the fact that they are hurling abuses to the Father of the Nation, First PM of the country and so many others. Its a gloomy time for the whole nation that such people are most strongest voice right now (coz of political backing)…

  4. Chalo yakub ko to fansi ho gai ..chillata raha ki mera koi hath nhi bumbdhamako men.khair..an unk bare men sochte he jinhone apne swajan gavaye the in bumbdhamako men..men Janna chahta hun k kitne hinduvadi inko madadrup hone k liye Gaye..1992 we lekar aajtak ?

  5. best suggestion is for you…. to avoid such kind of intervention who provokes peoples to think negative about you………

  6. श्रीमान
    हो सकता है कुछ लोगों ने गलत लिखा हो। आप सम्मानित पत्रकार है जिनका में सम्मान करता हूं। लेकिन rights को लेकर कब तक लोग आतंकवादियों का सपोर्ट करते रहेंगे। plz think about it

  7. अपने लिए एक झूठी खबर छपते ही लंबा चौड़ा लेख लिख दिया रवीश जी ने और उन झूंठी खबरों का क्या जो तुमने लगातार 13 साल गुजरात दंगो पर बनाई और दिखाई ??

    • आप तो सुप्रीम कोर्ट के जज से भी ज्यादा पावरपूल व्यक्ति हैं। गुजरात में हुए दंगों को ही सिरे से नकार दिया। वाह भाई वाह!

    • दिनेश जी आप गुजरात के मुस्लमान होते तो यह नहीं बोलते | आतंक का अर्थ समझा है आपने ? क्या जब कोई मुसलमान खौफ फैलाये वह आतंक है ? और अगर कोई हिन्दू खौफ फैलाये तो वह क्या है ? वह आतंकवादी नहीं है ? आजादी के बाद से अब तक हजारों बार बहुसंख्यक हिन्दुओं द्वारा आतंक फैलाया गया | पर उसे कभी आतंकवादी कहा आपने ? कभी किसी हिन्दू को आतंक फ़ैलाने के जुर्म में सजा दी गयी ? या कह दीजिये – भारत में एक भी मुसलमान दंगे में नहीं मारे गए हैं ?यह दंगा आतंक नहीं है ?
      आपको तो पता ही होगा की एक दशक पूर्व तक दुनिया का सबसे बड़ा आतंकवादी संगठन LTTE था | जो तमिल हिन्दुओ का संगठन था |

    • Haan Dinesh bhai, hamesha galat likhte hai, gujrat me koi danga nahi hua tha woh to kuch desh bhakto ne bas kuch 100/1000 ndian log mare the.

  8. Just remember the number of innocent lives being taken every year in the hand of terrorism. Don’t just try to find lacuna on minute level by your so called journalistic talents in legalities for a single person who is accused but try to use your skills looking more into the number of innocent lives and other related to them being affected so badly without no reason. Just try to cover stories pain of those who were victim not on the defence of one who are accused and has been tried by respected courts. Don’t try to be judge over legal system and judiciary. You are a journalist don’t behave as if you are a master of every subject and have right to be judgmental about others and people have no right to opine against you.

    • People die not just by terrorism, but also by drunk and drive filmstars, political opportunists inciting riots, while trying to assasinate PM, scams like vyapam, for being a witness against Gurus, by rape.. .. there are hundreds of reasons for people to die in india. Judiciary failed pathetically on all of the above fronts. Recently a bar council member said 30% of the lawyers are with fake certificates. Indian Judiciary has lost its credibility.

  9. बहोत ही तार्किक और धरातल पे लेकर समझाया हुआ लेख ..

    अब ऐसा लगने लगा है जी जीने की आज़ादी सिर्फ उन्ही लोगो को होगी यहाँ जो एक विशेष धर्म का अनुसरण करते है ।

    किसी भी कमेंट पे आपको सभी तरफ से घेर लिया जाता है ।। सलाम आप जैसे लोगो को की इनकी धमकिओ से न डरकर डटकर आप लोग ज़िन्दगी का असली चेहरा इन्हें दिखने की कोशिश करते है ।

    सभी को मॉफी मांगने का अधिकार है ,जीने का
    अधिकार है ,बोलने का अधिकार है ..

    • गुंडों को गुंडई करने का अधिकार है, लोगों को विरोध करने का अधिकार है पर गुंडई करने वाले लोगो को राजनीतिक अभयदान मिला हुआ हो तो निरीह लोगों का विरोध का कोई अर्थ ही नहीं रह जाता।?

  10. अगर ललित मोदी के समर्थन में पत्र लिखने से सुषमा स्वराज अपराधी हो गयी तो याकूब का समर्थन करने वाले सभी लोग आतंकवादी क्यों न कहें जायें…? Main kisi party vishesh ke samarthan mein nahi likh raha, bus wipreet paristhitiyo mein janta ko bhatkane wale patrakaro ki likhi hui in khokhali baato se pareshaan hoon. Ravish ji kabhi to apni aatma se bhi baat kijiye….Us disha mein kaam kijiye ki aapko log achha inassan kahe…Deshdrohi koi kabhi nahi kahega…

    • Bahut acchi baat kahi Ravi ji aapne… inn patrakaro ki baat aur gadhe ki laat ka kya bharosa kab badal jaye…
      Har channel pe Sushma swaraj se istifa mangne walo ko, Yakub ka samarthan karne pe Aatankwadi ghosit kar dena chahiye. Vaise… inn logo se poocho jara ki ek bhi uss aadmi jo unn bomb blast me maare gaye the unka naam bhi pata he… ya unka maut ka inn par kuch bhi asar pada he???? Agar unn logo me ek aadmi inke ghar ka bhi hota… toh aaj ye khud yakub ko fansi pe chada dete….

  11. शब्दों की सौदागरी अपनी जगह .न्यायालयों का निर्णय अपनी जगह ,पत्रकारिता अगर पीत होने में गुरेज नहीं करती तो जिस सोशल मीडिया ने कोर मीडिया से अक्षर ज्ञान सीखा है उससे कैसे तटस्थता की उम्मीद की सकती है प्रभु ?

  12. इन सारे मुद्दों पर एक ही बात याद आती है, श्री आनंद परवर्धन जी की फिल्म ‘राम के नाम’ के पहले दो मिनट में नेपथ्य से आवाज आती है, ‘आज चालीस साल बाद धर्म ने एकबार फिर करवट बदली है’/ मुझे इसी बात का उत्तर नहीं मिल पाता है कि जब आजादी के बाद के वर्षों में इतना धार्मिक उन्माद नहीं था तो अब क्यों ऐसी स्थिति आन पड़ी है/ इसका वयापक विश्लेषण होना चाहिए/ हमसे चूक कहाँ हो रही है/ इन ऑनलाइन गुंडों का एक मुख्य कारण तो देश की बढ़ी हुई बेरोजगारी है, ये मुख्यतः ख़रीदे हुए गुंडे होते हैं/ यह भी संभव हो कि कैरियर में ज्यादा सफलता ना मिलने के कारण कुंठित भी हों/ कभी कभी जिनके घरों में पहली शिक्षित पीढ़ी आई है उन्हें बहलाना झुठलाना आसान हो गया है/ उनके कोई मार्गदर्शक नहीं रहे और अति धार्मिक लोगों ने उनका फायदा उठाया है दोनों ही प्रमुख धर्मों में यह बात मिलती है/ अब यह राजनितिक दलों में भी मिलने लगी/

  13. इसमे दो राय नही आप एक सुलझे पत्रकार है,मै भी लाखो लोगो की तरह अापका फैन हू,आप के fb पर याकूब संबंधी हर पोस्ट की मैने आलोचना की है,इसलिए कि मुझे समझ नही आ रहा याकूब ( हिन्दू या मुस्लिम मुझे फर्क नही पङता) क्यू है वो शख्स जो किसी mercy का हकदार हो,जो पाकिस्तानी पासपोर्ट पर सफर करता हो,सैकङो लोगो की सुनियोजित हत्या का दोषी हो,उसका पूरा परिवार घटना मे शामिल थाऔर पाकिस्तान का शरणागत है जो अातंक का नियत्रंण केन्द्र. है,…..
    अाप माने ना माने ,आतंक को नैतिक समर्थन की जरुरत होती है और उसे मिल गया……
    एक डान ने धमकी दी है याकूब का बदला लेगें

  14. Bhakts are becoming intolerable every passing day.They have become ambassador of communalism,goondaism,fascism and indecency

  15. Waah kitni badhiya baat kahi hai aapne khaskar wo line “unki soch dharmik pahchan se aage nhi jati ve kab Pakistan ko aatanki bta dete hai aur kab hath milakar kutinitik sahas bta dete hai” salam hai aapko ravish ji

  16. Bus ek chhoti si ummid dikh rahi h ab is desh ko barbad hone se bachane ke liye agr is facebook ko band kar diya jae to shaed bahut had tak sudhar laya ja sakta h.

  17. Starting of yakub story from 1993 is totaaly wrong injustice its main root is 1992 when dirty religion base politics of Pakistani advani and bal thakry destroyed the communal harmony of our country’s. More important city Mumbai and thakry control slave Mumbai police killed 1000 innocent Muslim which finally created revenge taker yakub. Jai hind

  18. purani kahawat hai bewakuf ke pas dhan rahega to hoshiyar khane begair nahi marega…
    yaha dhan ka matlab owt aur hosiar kawn aap samagh gae honge…..

    ye sab vayapm ko dhakne kakhel hai
    ek din miting hoti hai dusre din yakub ko fasi ka allan hota hai…

    ek tir se do nishana haaaaaaàaa ap to samagh gae honge

    kya kaha jae

  19. They behave like NAZISM they don’t allow anybody to speak anything if you talk against them they give a tag that you are Pakistani
    Even in our country we are feeling suppressed
    It is not only in words but also in action
    We feel harassed at workplace also

  20. Time will come when people will do revolution on road for the people like Ravish Kumar Ji. The ANDHBHAKT has to stop himself otherwise people will make them to shut their mouth. These are few disturbing element to the society who is disturbing every one. Even they are going to disturb the people who is supporting them now… Desh bhakti thik hai lekin gndagardi karoge toh anjaam bahut bura hoga..

  21. जब मीडिया अपनी गलत बातें कह रहा है , तब तक रविश जी बहुत खुश हैं क्यों की येह उनका और उन जैसे कुछ और लोगों का एकाधिकार है. जब सोशल मीडिया पैर लोग अपमी बातें कह रहे तो उनको बुरी लग रही है. रविश जी जरा सोचिये आपकी कही हुई उलटी सीधी बातें भी लोगों को बुरी लगती हैं. और जितना बुरा अब आप को लोग रहा है उससे जय बुरी लगती है. और ध्यान रखिये, एल्क्ट्रोनिक मीडिया रेगुलेट हो सकता है. सोशल मीडिया नहीं.

  22. @Ravish Ji Aapke tarko ka aur sawaal poochne ke andaaj ka hamesha se kayal raha hun. Parantu ye bilkul bhi samajh nahi aata ki aaj aap log achanak se un 90 deshon ka udaharan kaise de paate hain jahan capitol punishment ban hai. Maanta hun ki faansi ke deterrent effect kam hi sabit ho paaye hain parantu Kasab ya Yakub ya fir Yaseen bhatkal logo ko jail mein rakhne se hi kaunsa purpose solve hua hai. Itne terrorists ko jail mein rakh ke kaun sa sudhaar aaya hai samaaj mein. To kyun fir hum tax payers ki mehnat ki kamaayi inpe kharch ho jinhone hamaare hi bhaiyon aur bachhon ko maara hai ya kisi bhi tarah se unki maunt ke jimmedaar hain.

    Rape ke aaropi ko bina tafteesh ke apraadhi banaane se na ye media chukti hai na hi samaaj fir bechara bhale hi jhoothe aaroop mein fansa ho uski kisi ko parwaah nahi tab kahan jaati hai aapki samvedna ki saboot kya hain ya fir wo sab TRP ke khel mein chalta hai? Kabhi aisi bhi story cover kariye jahan aarop mukt hua ek vyakti hero ki tarah dikhaya jaaye aur jhootha case file karne waali ladki ko jail mein daalne ki vakalat ki jaaye. Tab kyun bas ek statement ki ‘haan isne mera rape kiya hai” paryaapt ho jaata hai. Fir issi tarj pe kyun na aatankvaadi ko bhi maar diya jaaye chunki usne aatank failaya.

    Sabooton aur gawaahon ke chakkar mein padne ke dohre maapdand kyun?

    Kisaan jo faansi laga le usse cover kariye jiska koi gunah nahi, uski peeda ko samajhiye naaki aise aatankvaadiyon ki.

  23. ऑनलाइन गुंडागर्दी करने वालों को उनके आकाओं द्वारा यह प्रशिक्षण दिया जाता हैं की आतंकवाद देशद्रोह और नक्सलवाद देश भक्त होता है। दरअसल आतंकवाद की परिभाषा ही अस्पष्ट नहीं हैं। लोग अपने अनुसार इसका मतलब समय समय पर अलग अलग निकालते हैं। उदहारण के तौर पर हम “भगत सिंह” को “शहीद भगत सिंह” कहते हैं और उस समय की सरकार और अदालत उसे आतंकवाद साबित कर फांसी पर लटका दिया। उसी प्रकार नेल्सन मंडेला को आतंकवाद कहकर वर्षों जेल में बंद रखा गया और फिर उसी नेल्सन मंडेला को शांति के लिए नोबल परुष्कार मिला। उसी प्रकार ” हिंसा” को किर्या और प्रतिकिर्या के भेदभाव में बाँट कर उस की तीव्रता जांचा परखा जाता है। किर्या द्वारा खून हुवा तो फांसी और प्रतिकिर्या द्वारा खून हुवा तो तमगा। दरअसल यह ऑनलाइन गुंडे यह नहीं चाहते के हर कोई अपने विवेक का इस्तेमाल करके अपनी तरह सोंचे समझे वह तो यही चाहते हैं की वह जो सोंचे वही सब सोंचे, वह जो कहे वही सब माने। अपनी बात कहने का अधिकार संबिधान ने हर किसी को दिया है पर यह लोग कभी धर्म के नाम पर तो कभी देशभक्ति के नाम पर इस तरह डराते धमकाते हैं की बात संवाद करना भी डोभर होजाता है। यह लोग इतने हिंसक होजाते हैं की यदि आप ने इन की बात नहीं माना तो देशद्रोह का सर्टिफिकेट दे देते हैं। इनकी शक्ति प्रति दिन बढ़ती जारही है। यदि हम इसी प्रकार “साहिल के तमाशाई ” बने रहे तो हम भी वही करने या कहने लगेंगे जो यह लोग करते हैं या कहते हैं। संभल जाइए और ऑनलाइन गुंडागर्दी के खिलाफ आवाज़ उठाईये।

  24. श्रीमान रविश ने जो कहा है उसी तरह तथ्यों को समझाने की कोशिश की है अमूमन जैसे वह अपने न्यूज़ चैनल पर करते हैं ! परन्तु इसको बुली और कुछ भी संज्ञा देना पूरी तरह गलत है ये कॉमन मन भी हो सकते हैं जिसे ऑफिस घर के कार्यों से ज्यादा फुरसत नहीं मिलते हैं परन्तु एक नजर में ही क्रिमिनल को क्रिमिनल समझते हैं आप एक रोटी चुराने वाले को भी कड़ी सजा देते हो ये बताओ सभ्य समाज में बम फोड़ना कहाँ तक ठीक है आप जब चैनल पर चर्चा करते हो तो आपको ये हक़ है की उस वक़्त कार्यक्रम का समापन कर सकते हो जब आपकी बात की पुष्टि हो जाती हो परन्तु ये समझ लो की यूनिवर्सल ट्रुथ को समझना हर किसी के बस की बात नहीं होति

  25. Raveesh Ji! I must say just stop bothering right and wrong, zyada tar mazboot log greed se ghire hain and u can not fight their goons, most of the Indian Muslims now know their fate and almost other minorities too. Ab ye sab nahi rukne waala kyunki now it is a mindset of a common majority. Aur haan bhale hi aap honest rahe hon, but baaki ka media is mahaul k liye 90 percent responsible hai.

  26. Agar Aap Sab Ko Insaaf Itna Hi Pasand Hai Ki Tamam Logon Ki Request Ko Reject Kar diya To..
    Ye Adalat Kiski Sifarish Se Gujraat K Dangon K Maliko Ko Khula Chor Rakha Hai…
    Kya Usme Musalmano Ka Qatl-E-aam Nahi hua.???

  27. Ravish jee !!! I have followed you through your TV programme and blogss for last 5 year. I have analysed that you are also biased for a particular party. You always try to present the facts and figures so that image of particular party could be malign. Pl think it before throw kichar on others….

  28. SAMBIDHAN SAMMAT VICHARON KI ABHIBYAKTI SBHI KA MAULIK ADHIKAR HAI . EK VISESH VYAKTI, EK VISESH PARTI ATHWA EK VISESH DHARM KE PRATI ANDHABHAKTI DESHBHAKTI KI PARIBHASHA NAHI HAI.KISI BHI APRADHEE KO DAND AWASHYA MILNA CHAHIYE CHAHE WO GAALI DENEWALA HO YA GOLI MARNEWALA HO. AISA NAHI HONE PAR ANDAR SE YAHI LOG APNE AAP KO JYADA SURAKSHIT MAHSUSH KARENGE AUR BAR BAR APRADH KARKE APNE AAPKO KATHIT DESHBHAKT SABIT KARENGE.

  29. SAMBIDHAN SAMMAT VICHARON KI ABHIBYAKTI SBHI KA MAULIK ADHIKAR HAI . EK VISESH VYAKTI, EK VISESH PARTY ATHWA EK VISESH DHARM KE PRATI ANDHABHAKTI, DESHBHAKTI KI PARIBHASHA NAHI HAI.KISI BHI APRADHEE KO DAND AWASHYA MILNA CHAHIYE CHAHE WO GAALI DENEWALA HO YA GOLI MARNEWALA HO. AISA NAHI HONE PAR ANDAR SE YAHI LOG APNE AAP KO JYADA SURAKSHIT MAHSUSH KARENGE AUR BAR BAR APRADH KARKE APNE AAPKO KATHIT DESHBHAKT SABIT KARENGE.

  30. I am little bit agree wih Ravish that some political agents are spreading out voilance throught social media but as Yakub is concerened,he was accused and should have been given capital punishment. but i dont think it may written in any holy book like quraan,bible,puran or ved that we should make fun or laugh on death whether he be accused or victim. We should also not support when a accused has been given capital punishment with a logic that why should he not be given bla bla bla…..I think nationality not should be measured by words, it should be by works and hearth.

  31. You are right Ravishji. But you are late …very very late.

    Online kurukshethra started sometime back by one political party. All of you praised and some joined the ‘Behti Ganga’… The result the big bang election of 2014. Others are catching up the trend and now it got messier.

    Many a times the mainstream media is so very late in taking moral stand. After 25 years of advertising Fair and Lovely. … does it make any difference if you stop that now? Like Sir Prannoy Roy said… in 3 years mainstream will loose its credibility. So will social media.

  32. My dear Ravish ji, I know it is a serious matter and I have all sympathy with you. If a genuine and prominent citizen like you is branded as gaddar or desh drohi, then think of others who are genuine but ordinary citizens. In our country the rationale people are in minority but I have great expectations from these people. May God bless our country and protect it from these goons.Ultimately these goons will also realize as to what is good for our nation.

  33. aap apni bat puri khul kr bolte hai. or kisi party ka support nhi krte h.so i like u ravish jee. and sare media bale feku ka kam karta h. and ye jo watsp pe vej raha h. ye sb feku ka chela chapati hai
    so don‘t worry. ab feku ko hos me lana jaruri ho gya h. ye sb janta samaj rhi hai.

  34. kal jo do dalito hacked liya h kya gaddari nhi insaniyat ke perti vo bhi intellctual jati ke duara that is brahman or jitane bhi desh m kand ho rahe h vo brahman dura sthapit system ki vjah se ho rahe hagar in muddo ko ravish ji uthate h to inki imandari per swal uthata h jisko ye sahan nhi kar sakte h

  35. आज इस देश का माहोल इतना ख़राब हे की सोच कर भी दुःख होता है। भूख गरीबी बेकारी की बातो को छोड़ कभी आतंकवाद या ऐसी गैर जरुरी बातो पर बहस की जाती हे। आतंकवाद पूरी दुनिया में फैला हुआ है और सभी देश इस पर राजनीती करते हे इसका मूल कारण क्या है और कैसे मिटाया जा सकता है। कभी नहीं सोचा। भूख गरीबी सभी समस्याओ का कारण हे। साथ साथ गरीब अमीर के बीच की दूरी बढ़ रही हे और यही सब बुराई की जड़ है अतः इस पर विशेष ध्यान दिया जाय तो सभी समस्याओ का समाधान हो सकता हे।

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