इस ख़ास जीत के मायने – Kishore

Kishore

आम आदमी पार्टी ने दिल्ली में 70  में से 67 सीटें जीत कर दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में इतिहास रच दिया I आज से पहले जब कई लोग वोट देते थे तो दिमाग में रहता था कि “lets vote for lesser evil “I  “lets vote to keep fascist forces out” आदि आदि I  हम जैसे ज्ञानी लोग वोट देने को मात्र एक व्यापक रणनीती का हिस्सा मानते थे I  अक्सर बात करते थे कि कोई विकल्प ही नहीं है लेकिन वोट न देने को राजनैतिक अज्ञानता मान कर वोट देने की रस्म हमेशा निभाते रहे हैं I

जब केजरीवाल अन्ना आन्दोलन के भाग थे तो वो आभास दे रहे थे कि जन लोकपाल लाने से सब ठीक हो जायेगा I  जैसे कि सब समस्याओं की जड़ में मात्र भ्रष्टाचार हो I  उन्होंने कभी कहा नहीं लेकिन उनके समर्थन में आई आवाम के बीच फैले इस भ्रम को दूर करने की भी कभी कोशिश नहीं की कि भ्रष्टाचार ख़त्म होने और जनलोकपाल लाने से व्यवस्था में आमूल चूल परिवर्तन हो जायेगा I शायद इस आन्दोलन के नेता  भी इस  भ्रम के शिकार थे I

इस आन्दोलन के पीछे जो दर्शन था या अभी भी है वह कितना ठोस या कितना खोखला है, यह  बहस का मुद्दा हो सकता है पर इसे मिले अपार जन समर्थन से कोई इंकार नहीं कर सकता I  हमारे कई भाई जन इससे काफी परेशान थे I  उन्हें लग रहा था कि उम्र बीत गयी “जन आन्दोलन” खड़ा करने में पर वह कुछ सौ लोग भी नहीं जुटा पाए और इस सरफिरे अन्ना ने रातो रात जनांदोलन खड़ा कर दिया I  वामपंथियों और प्रगतिशील ताकतों के बीच इस आन्दोलन को लेकर बहुत् बहस चली है I

एक पक्ष वह है जो इस मुहीम को दिग्भ्रमित आन्दोलन बता रहा था और  कई दिग्गजों नें तो इसे प्रतिक्रियावादी भी घोषित कर दिया था I  इससे किसी भी तरह के सम्बन्ध को “क्रांति“ के विरुद्ध दक्षिणपंथियों के षड़यंत्र के रूप में देखा जा रहा था I सन  2014 के आम चुनावो में वह लोग काफी हद तक सही भी साबित हुए जब बी जे पी सत्ता में इतने अंतर से बहुमत में आई I  इस बात को नाकारा नहीं जा सकता कि इस आन्दोलन का वास्तविक फायदा बी जे पी को ही हुआ और वह सत्ता  में काबिज हो पाए I

इस आन्दोलन ने वह पृष्ठभूमि तैयार की जिसमें एक ऐसे नेता की जरूरत महसूस की गयी जो मजबूत नेता और भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने वाले व्यक्ति का आभास दे सके  I  इस भूमिका को मोदी ने बखूबी निभाया और अपने को एक ऐसे नेता के रूप में पेश करने में सफल हुए जो भ्रष्टाचार मुक्त मजबूत सरकार देने में सक्षम है I  उन्होंने यह भूमिका कहाँ तक निभाई यह उनके शासन के दस महीनो में सबके सामने है I

वहीँ प्रगतिशील ताकतों का एक धड़ा ऐसा भी था जिसे इस आन्दोलन का माध्यम वर्गीय चरित्र और इसे खड़ा में मीडिया का रोल नज़र नहीं आ रहा था और वह इसे मजदूर वर्ग अथवा सर्वहारा का प्रतिनिधि बता रहा था I  इस धड़े को लग रहा था कि इसमें शामिल न होकर और मेहनतकश आवाम की नुमाईंदगी ना करके वामपंथ एक एतिहासिक भूल कर रहा है I  उन्हें इस आन्दोलन में अन्ना जैसे नेताओं का तानाशाही चेहरा भी नज़र नहीं आ रहा था और वह इस आन्दोलन में शामिल न होने को वामपंथियों के अहंकार के रूप में देखा रहे थे I

लोकपाल आन्दोलन के मंच से आम आदमी पार्टी का जन्म हुआ और उसने न केवल भ्रष्टाचार बल्कि बिजली पानी जैसे जनसाधारण के मुद्दों से अपने आन्दोलन को जोड़ा I  इसका लाभ भी इसको मिला और जनता ने इसे 2013 चुनावों में अच्छा खासा समर्थन दिया I

यह जनमत नकारात्मक नहीं था I  लोगों को आम आदमी पार्टी के रूप में एक सकारत्मक विकल्प नज़र आया जो उन्हें रोजमर्रा की जद्दोजहद से मुक्ति दिला सकता है I  उस समय यह भी सुनने में आया कि कई लोगों ने आप को इसलिए वोट नहीं दिया क्योंकि उन्हें इनकी सफलता की आशा नहीं थी I  अगर उन लोगों को भी इनकी सफलता की आशा होती तो शायद 2013 में ही इन्हें बहुमत मिल जाता I

लेकिन इस बार सबको एक विकल्प, एक आशा नज़र आई है I   हम सब ने मिलकर एक वैकल्पिक सरकार चुनी है I  इस जीत के तमाम तरह के विश्लेषण किये जा रहे हैं I  लेकिन इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि यह जीत एक ऐसे परिवर्तन का संकेत है जिसका  प्रभाव पुरे हिंदुस्तान के राजनैतिक पर पड़ सकता हैं और यह वर्तमान राजनैतिक परिदृश्य में एक सकारात्मक परिवर्तन है.

आम आदमी पार्टी एक बहुत बड़े बहुमत से जीती है I  मतों का लगभग 60% भाग आप के हिस्से में आया है जो अपने आप में एक इतिहास है I  जिम्मेदारी भी बड़ी है अपेक्षाएं भी I  लेकिन यह अपेक्षाएं हैं क्या? आम आदमी पार्टी ने हमारे रोजमर्रा के जीवन से जुड़ी कुछ समस्याओं से समन्धित कुछ वादें किये है और यह अपेक्षाएं भी उसी से जुडी हैं I  लोग उम्मीद कर रहें हैं कि बीजली कंपनियों के घोटालों में कमी होगी और इसका फायदा आम आदमी के बिजली के बिल पर पड़ेगा. दिल्ली की अधिकांश जनता को पानी और साफ सफाई की मूलभूत सुविधाएँ मिलेगी. आम आदमी से जुड़े महकमों में भ्रष्टाचार ख़त्म होगा और हमें एक साफसुथरा शासन मिलेगा.

बहुत से लोग और पार्टिया यह कह रहें कि आम आदमी पार्टी की जीत मुफ्त सुविधाओं के वादों की जीत है और इन सब वायदों को पूरा करना व्यवाहरिक नहीं है I  उनसे पुछा जाए कि उचित दरों पर बिजली दिलाना , सबको पानी देने का वायदा करना , झुग्गी झोपड़ियों और पुनर्वास कॉलोनियों को मूलभूत सुविधाओं का वादा करना और भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहीम  छेड़ने का वायदा करना किस तरह से मुफ्त सुविधाएँ हो गयी और क्यों व्यावहारिक नहीं है I

प्रश्न प्राथमिकताओं का है व्यावहारिकता का नहीं I  यह सब सुविधाएँ आम आदमी का हक है और इनको उपलब्ध करना हर सरकार का कर्तव्य I  अभी तक सभी पार्टियों की प्रथिमकता एक खास वर्ग के  विशेषाधिकारों  को सुरक्षित रखने की रही है आम आदमी के हकों की रक्षा करने की नहीं I  आम आदमी पार्टी ने यह हक दिलाने का वायदा किया है नाकि मुफ्त सुविधाएँ बाँटने का I

अब प्रश्न यह उठता है क्या आम आदमी पार्टी इन वादों के प्रति संजीदा है या तमाम पार्टियों की तरह यह वादे उनके घोषणापत्र तक ही सीमित रह जायेंगे I  मुझे निजी तौर पर आम आदमी पार्टी की संजीदगी और ईमानदारी पर कोई सुबा नहीं है I  पर निश्चित तौर पर आम आदमी पार्टी के दर्शन में उन कारको को तवज्जो नहीं दी गयी है जो इन सब सुविधाओं/ हक़ों को आम आदमी तक पहुचने तक रोकते आयें हैं I

वह आज भी भ्रष्टाचार को इसका मुख्य कारण मानती है और इन सब समस्यों के पीछे व्यस्थात्मक कारणों के जानिब नजरें मूँद लेती है I  विकास के इस मॉडल में जो शोषण निहित है उसका आप आदमी पार्टी के फ़लसफ़े में कहीं उल्लेख नहीं मिलेगा I  वह विकास के इस मॉडल पर प्रश्न नहीं उठाती जिसमे सामाजिक विषमतायें इस हद तक बढ़ गयी हैं और दो वर्गों के बीच खाई इस कद्र बढ़ गयी है जिसे पाट पाना बिना व्यवस्था परिवर्तन के संभव नहीं है I  बाज़ार और मुनाफे पर आधारित इस व्यवस्था का आम आदमी पार्टी के पास कोई विकल्प नहीं है. इसीलिए आम आदमी पार्टी में आपको तमाम विरोधाभासी विचारधाराओं के शख्स मिल जाएँग I  बहुत से लोग इस पार्टी में मात्र निजी स्वार्थ के लिए शामिल हुए हैं  नाकि वैकल्पिक राजनैतिक व्यवस्था स्थापित करने के लिये I   इस तरह के तत्वों से निपटाना भी इस पार्टी के लिए एक चुनौती रहेगा I

आज भारत में पूंजीवाद अपने वीभत्स अपराधिक रूप में है I  यह आम आदमी पार्टी का दर्शन उस भाई भतीजा पूंजीवाद से तो शायद मुक्ति दिला और एक स्वस्थ्य पूंजीवाद की नीव रख पाए पर इनसे शोषण रहित समाज की अपेक्षा करना बचकाना होगा I  पूंजीवाद के इस वीभत्स रूप से मुक्ति एक सकारात्मक बदलाव होगा लेकिन अगर कुछ भाई बंधू यह मुगालता पाले बैठ हैं  कि इनका दर्शन शोषण पर आधारित समाज से मुक्ति दिलाएगा तो यह विचार अपने दिल से निकाल दें I  यह स्पष्टता हमारे उन भाई बहनों के लिए जरूरी है जो इस आन्दोलन को सर्वहारा का प्रतिनिधि बता रहे हैं I

यह स्पष्टता इसलिए भी जरूरी है ताकि हम इस पार्टी से गैरवाजिब अपेक्षाएं न रखें I  आप को सत्ता में आये अभी महीना भी नहीं हुआ और बहुत से लोग इनसे उनकी उपलब्धियों का हिसाब किताब मांगने लग गए है I  आप के पास कोई जादू की छड़ी नहीं है जिसे घुमाते ही सब ठीक हो जायेगा I  हम सबने मिलकर एक वैकल्पिक राजनीति  की शुरुआत की है और वैकल्पिक राजनैतिक व्यवस्था स्थापित करने का बीड़ा अकेले आम आदमी पार्टी का नहीं है. इस राजनैतिक परिवर्तन के लिए हम सबको भूमिका निभानी होगी I

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