क्या होगा धर्मान्तरण कानून से? – कॅंवल भारती

Kanwal B

संघ परिवार और भाजपा ने देश में लगभग वही साम्प्रदायिक हालात पैदा कर दिए हैं, जो उसने 1990-93 में पैदा किए थे। 1993 में केन्द्र की कांग्रेस सरकार ने आक्रामक साम्प्रदायिकता से निपटने के लिए संसद में एक ‘धर्म-विधेयक’ प्रस्तुत किया था। अगर वह विधेयक पास हो गया होता, तो भाजपा की बेलगाम साम्प्रदायिकता पर लगाम लग गई होती। पर कांग्रेस की गलती से ही वह पास नहीं हो सका था, जबकि भाजपा और संघपरिवार को उसने माहौल गरमाने का हथियार थमा दिया था। विधेयक के विरोध में उसने रातों-रात न केवल धर्म की परिभाषा बदल दी थी, बल्कि उसके खिलाफ अपनी 15 हजार किलोमीटर लम्बी ‘जनादेश यात्रा’ भी आरम्भ कर दी थी। कांग्रेस सरकार ने उसको रोकने का कोई प्रयास नहीं किया था। अतः संघपरिवार की जनादेश यात्रा और मशाल जुलूसों ने ऐसा माहौल गरमाया कि सरकार को पीछे हटना पड़ा और विधेयक लोकसभा में पेश ही नहीं किया जा सका।
आज भी लगता है कि इतिहास अपने को दोहरा रहा है। अब चूँकि केन्द्र में भाजपा की सरकार है, इसलिए संघपरिवार के लिए स्थिति ज्यादा अनुकूल है। जब सैयां भए कोतवाल तो डर काहे का? इसीलिए सरकार ने भी अभी तक रामजादे-हरामजादे, गीता, घर-वापसी और धर्मान्तरण पर संघपरिवार की उन्मादी साम्प्रदायिकता को रोकने के लिए कोई आवश्यक कार्यवाही नहीं की है। यह उन्मादी साम्प्रदायिकता सरकार पर धर्मान्तरण-विरोधी कानून बनाने का दबाव बना रही है। स्वयं भाजपा अध्यक्ष अमित शाह जबरन धर्मान्तरण को रोकने के लिए कानून बनाने की पैरवी कर रहे हैं।
लेकिन सवाल यह है कि जबरन धर्मान्तरण करा कौन रहा है? मुसलमानों या ईसाईयों की कौन सी मिशनरी संस्था है, जो हिन्दुओं का जबरन धर्मान्तरण कराने में लगी हुई है? उसका नाम क्यों नहीं बताया जा रहा है? क्यों इस मूल सवाल का जवाब संघपरिवार और भाजपा के नेता नहीं दे रहे हैं? क्यों जबरन धर्मान्तरण का हवाई तीर छोड़ा जा रहा है? वे देश को बताएं, संसद को बताएं कि इन छह महीनों में, जबसे मोदी सरकार बनी है, कितने हिन्दुओं को जबरन मुसलमान या ईसाई बनाया गया है और किन राज्यों में? क्या जबरन घर-वापसी का घटिया ड्रामा खेलने के बाद अब वे जबरन धर्मान्तरण का हवाई शिगूफा छोड़कर वही खौफनाक खेल तो नहीं खेलना चाहते हैं, जो उन्होंने वाजपेयी सरकार में उड़ीसा के आदिवासी क्षेत्रों में खेला था, जिसके तहत उन्होंने चर्चों पर हमले कराए थे और पादरियों की हत्याएं कराईं थीं?
अगर हम इतिहास में न जाएँ क्योंकि इतिहास कब का दफन हो चुका है, तो जबरन धर्मान्तरण एक झूठ है, और भगवा पलटन झूठ की राजनीति कर रही है। अपवाद को छोड़ दें, तो जबरन धर्मान्तरण होता ही नहीं है। हाँ, भगवा पलटन जरूर सत्ता के नशे में जबरन धर्मान्तरण कराती फिर रही है। एक सवाल यह भी जहन में घूम रहा है कि जब हिन्दूधर्म में धर्मान्तरण और घर-वापसी की अवधारणा ही नहीं है, तो संघपरिवार धर्म-विरुद्ध कार्य क्यों कर रहा है? क्यों उसे धर्मान्तरण की चिन्ता हो रही है? उच्च जातियों के हिन्दू तो धर्मान्तरण करते नहीं हैं, अगर करते हैं, तो निम्न जातियों के लोग करते हैं, जिन्हें हिन्दू समाज में वैसे भी सम्मान के योग्य नहीं समझा जाता है। गौर तलब यह भी है कि हिन्दूधर्म शास्त्रों में धर्मान्तरण को स्वीकृति नहीं दी गई है। फिर, कोई शंकराचार्य शास्त्रों की दुहाई देकर इस अधर्म को रोक क्यों नहीं रहा है?
13 दिसम्बर 2014

Advertisements

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s