‘हिंदू पक्ष में असंतोष नहीं होता वो शायद मेरे पास नहीं आते, भड़कते नहीं’

2008 से 2013 तक त्रिलोकपुरी सीट से बीजेपी के टिकट पर एमएलए रहे सुनील वैद्य।
2008 से 2013 तक त्रिलोकपुरी सीट से बीजेपी के टिकट पर एमएलए रहे सुनील वैद्य।

हिंसा और तनाव के बीच त्रिलोकपुरी में एक हफ्ता गुज़र चुका है। कर्फ्यू में छूट के घंटे लगातार बढ़ाए जा रहे हैं लेकिन दिल्ली पुलिस और सेंट्रल फोर्स अभी भी यहां जमी हुई है। लोग घरों से इस उम्मीद में बाहर निकल रहे हैं कि ज़िंदगी जल्दी पटरी पर वापस लौट आएगी। बार-बार एक सवाल उठा कि बीजेपी के एक्स एमएलए सुनील वैद्य की इस दंगे में भूमिका है। आरोप है कि दिवाली की रात उन्होंने एक मीटिंग की थी और उसी के बाद दंगा भड़का। पॉलेटिकल साइंस और हिस्ट्री के स्टूडेंट रह चुके सुनील वैद्य स्कूल टाइम से ही आरएसएस से जुड़े रहे हैं। उनसे बातचीत की पहली किस्त।

सवाल: आपका बैकग्राउंड क्या है?

जवाब: मेरी पैदाइश बाल्मिकी बस्ती, मंदिर मार्ग की है। भगत सिंह कॉलेज, दिल्ली यूनिवर्सिटी से मैंने पॉलेटिकल साइंस (ऑनर्स) में ग्रैजुएशन किया। 2003 में मैंने चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी, मेरठ से हिस्ट्री में पीजी किया। स्कूल टाइम से ही आरएसएस से जुड़ गया था।

सवाल: आरएसएस में क्या किया?

जवाब: संघ के लिए काम किया। सह नगर कार्यवाहक बनने के बाद 1998 में बीजेपी जॉइन किया। बीजेपी में डिस्ट्रिक्ट प्रेजिडेंट रहा और 2008 में पार्टी के टिकट पर त्रिलोकपुरी सीट से एमएलए बना। मेरे कार्यकाल में यहां कोई दंगा नहीं हुआ। छोटा-मोटा तो सब जगह होता है। मैंने सभी के साथ मिलकर काम किया। अभी भी मुस्लिम समाज में मेरी अच्छी पैठ है।

सवाल: आपकी पार्टी से कुछ मुस्लिम लोग जुड़े हुए है?

जवाब: बिल्कुल। बहुत सारे मुस्लिम हैं।

सवाल: उनके नाम ?

जवाब: अभी वो नाम थोड़ा डिस्प्यूटेड हैं।

सवाल: क्यों? डिस्प्यूटेड क्यों?

जवाब: क्योंकि अभी जो झगड़ा हुआ है ना? तो सभी हिंदू से सवाल हो रहा है, सभी मुस्लिम से सवाल हो रहा है। मैं नाम बता देता हूं। मोहम्मद अली जैदी। ये बीजेपी के मंडल उपाध्यक्ष हैं। और बहुत सारे लोग हैं लेकिन मैं नाम डिस्क्लोज़ नहीं करना चाहता।

सवाल: एक नाम ज़फर नक़वी का आ रहा है?

जवाब: इसीलिए मैंने कहा ना। वो ज़फर नकवी नहीं रिज़वी है।

सवाल: क्या हैं ये?

जवाब: नहीं, अभी नहीं। इनकी भूमिका ज़रा संदिग्ध है ना। कुछ लोगों ने शिकायत कि है फायरिंग कर रहे थे। तो मैं अभी उनको कोट नहीं करना चाह रहा क्योंकि अभी इनकी जांच चल रही है।

सवाल: यह अंडरग्राउंड हैं क्या?

जवाब: मुझे पता नहीं क्योंकि मैं आजकल यहां से बाहर नहीं जा रहा। उनका नाम कोट मत करना। मतलब मेरे रेफरेंस से कोट मत करना। वैसे आप कोट कर सकते हैं। आप अपनी तरफ से कोट करना चाहें तो मोहम्मद ताहिर है, रिज़वी है और…. बहुत सारे लोग हैं लेकिन अभी सभी से पूछताछ चल रही है।

सवाल: पुलिस इनसे मिल चुकी है या ये अंडरग्राउंड हैं?

जवाब: मुझे पता नहीं। बस ये सुनने में आया था कि इन्होंने फायरिंग की है। पुलिस से इनका क्लैश हुआ है।

सवाल: और ये बीजेपी से जुड़े हुए हैं?

जवाब: हां

सवाल: मुझे समझ नहीं आ रहा कि ये बीजेपी से जुड़े हैं और मुसलमानों की तरफ से फायरिंग की?

जवाब: यही तो कह रहा हूं मैं। मुझे भी समझ नहीं आ रहा। सब लोग जब मिलेंगे और बातचीत होगी, तभी पता चलेगा ना। अभी तो इनसे मुलाकात भी नहीं हुई है।

सवाल: क्या आपने दिवाली की शाम कोई मीटिंग की थी?

जवाब: नहीं, गलत है ये। मैं थोड़ा सा बताना चाहता हूं दंगे के बारे में आपको। पहले नवरात्र को 20 नंबर ब्लॉक में चौकी की स्थापना हुई। चौकी लगाई जाती है विशाल जागरण के लिए। उसका एक टाइम होता है। 10 दिन, 15 दिन, 20 दिन। तभी मुस्लिमों ने मना किया कि यहां चौकी मत लगाइए लेकिन पुलिस प्रशासन और समाज के इंटरवेंशन के बाद चौकी लग गई। तो चौकी लगने से लेकर दीपावली तक इस चौकी को लेकर जो मुस्लिम बैड एलिमेंट हैं, उन लोगों ने डिस्टरबेंस बनाकर रखी। छोटे-मोटे झगड़े लगभग चार-पांच बार किए। इसमें चौकी लगाने वालों का मानना है कि पुलिस ने कोई इफेक्टिव भूमिका नहीं निभाई। पुलिस ने नोट नहीं किया कि ये खतरनाक भी हो सकता है। दिवाली की रात कुछ बैड एलिमेंट चौकी के सामने शराब पी रहे थे। मना करने पर झगड़ा किया और तभी मुझे फोन आया कि यहां पथराव हो गया है। जिन हिंदुओं ने मना किया, उनपर पथराव शुरू हो गया। तो एकदम से हिंदुओं पर इतना ज़्यादा पथराव, इतना हमला। ऐसा लगा कि यह पहले से तय था। एकदम से इतना पथराव कैसे हो सकता है? इतनी ईंटें कहां से आ सकती हैं?

सवाल: जो लोग वहां शराब पी रहे थे। उनका इरादा तनाव पैदा करने का था या फिर आपसी झगड़ा था?

जवाब: नहीं, नहीं, नहीं। उनका इरादा था कि जानबूझकर इस माता की चौकी को लेकर डिस्प्यूट करना है। उनका इरादा था माता की चौकी हटाना या फिर जो लोग वहां पूजा करते हैं, उन्हें हटाना। पथराव के बाद पुलिस ने दोनों पक्ष के कुछ लोगों को गिरफ्तार कर लिया। फिर सब शांत हो गया।

सवाल: फिर दोबारा पथराव कब शुरू हुआ?

जवाब: दिवाली की रात से 24 की इवनिंग तक कोई झगड़ा नहीं हुआ। फिर शाम को मेरे पास लगभग 50-60 हिंदू आए। उनकी शिकायत थी कि पुलिस ने दीवाली वाली रात की घटना ढंग से कार्रवाई नहीं की है। तब मैंने डीसीपी साहब को कॉल किया और बताया कि कुछ हिंदू लोग आए हुए हैं और कह रहे हैं कि दिवाली की रात जो झगड़ा हुआ था, उसमें पुलिस ने एक्शन नहीं लिया है। आप यहां किसी अफसर को भेजें जो लोगों को बताएं कि आपने क्या एक्शन लिया है? फिर एसीपी, एडिशनल एसएचओ समेत कुछ पुलिसवालों को मेरे पास भेजा। इन सभी अधिकारियों ने जनता को समझाया और बताया कि क्या-क्या एक्शन लिया है। तभी आठ एक बजे के आसपास एसीपी के पास कॉल आया कि झगड़ा हो गया है। कुछ लड़के मेरे पास भी दौड़कर आए कि सर झगड़ा हो गया है। तभी सारे लोग यहां से भागकर चले गए।

इसमें 24 की रात को झगड़ा हुआ और 25 के दिन में हुआ। मेरा मानना है कि अगर 23 की रात में जो घटना घटी थी, पुलिस ने उसे इफेक्टिवली हैंडिल कर लिया होता और हिंदू पक्ष में असंतोष नहीं होता वो शायद मेरे पास नहीं आते, पुलिस में शिकायत नहीं करते, यह असंतोष भड़कता नहीं।

सवाल: यानीकि पुलिस की ओर से सही कार्रवाई नहीं होने पर हिंदू समाज नाराज था, भड़का हुआ था?

जवाब: भड़के हुए नहीं थे, नाराज़ थे। वो नाराज़गी की वजह से ही मेरे पास आए थे कि पुलिस से मेरी बात करवाइए। मेरी सहायता करिए।

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