मजबूत और स्थायी सरकार के मायने

Image

नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा की जीत के बाद अखबार, टीवी चेनल्स, सोशल साइट्स और गली, मोहल्लों, घरों में होने वाली चर्चा में एक बात लगातार सुनने को मिल रही है कि स्पष्ट बहुमत से एक मजबूत और स्थायी सरकार बनेगी जो देश के लिए बहुत फायदे की चीज़ है.  कारण पूछने पर जवाब मिलता है कि किसी भी नीति, कानून या कार्यक्रम पर निर्णय लेने के लिए ये सरकार अन्य दलों की मोहताज़ नहीं होगी और सरकार बिना किसी रोकटोक के अपने कार्यक्रम लागू कर सकती है.

बात कुछ-कुछ समझ आती है कि स्पष्ट बहुमत के चलते यह सरकार बे रोक-टोक निर्णय ले सकती है और इस पर किसी अन्य दल का कोई अंकुश नहीं होगा. पर सवाल उठता है कि ये निर्णय किसके हक़ में होंगे और किसके खिलाफ. क्या ये देश की आम जनता के हित में हैं कि सभी निर्णय एक ही पार्टी तय करे? क्या बे रोक-टोक निरंकुश सरकार आवाम के हित में है. इतिहास गवाह है कि मजबूत राज्य ने अपनी ताक़त का इस्तेमाल जनता के हक में कम और उनके खिलाफ ज्यादा किया है. ये सरकार उनसे किस तरह अलग होगी ये तो वक़्त ही बताएगा.

अपने पिछले शासन काल ( 1998-2002) में एन.डी.ए ने पाठयक्रम का भगवाकरण करने का प्रयास करके अपने मसूबों की झलक दिखाई थी. प्रोफ़ेसर रोमिला थापर और बिपिन चन्द्र को NCERT से दरकिनार कर उन्होंने इसकी शुरुआत की थी. भाजपा और संघ समर्थक अन्य ताकतों का कहना था कि हमारे पाठ्यक्रम में मुग़ल शासन काल को कुछ ज्यादा ही सकारत्मक ढंग से लिखा गया है और भारतीय संस्कृति और इतिहास को उचित दर्जा नहीं मिला है. पाठ्यक्रम के भगवाकरण के कुछ प्रयास और भी किये गए थे पर गठबधन में अन्य दलों के दबाव और विपक्ष के विरोध के कारण भाजपा के मंसूबे पूरे न हो सके. आपको याद दिला दूं की विकास के नाम पर SEZ  जैसी जनविरोधी नीतियों की शुरुआत भी  एन.डी.ए के शासनकाल में ही हुई थी.

उस समय भाजपा पर घटक दलों और विपक्ष का दवाब था और उसके कारण अपने कई मंसूबे पूरे नहीं कर सका था. पर इस बार भाजपा पर कोई दबाव नहीं है. स्पष्ट बहुमत के साथ एक मजबूत सरकार और उसके मुखिया के राज्याभिषेक की तैयारीयां हो रही हैं. उसके बाद वह चाहे जो कानून पास करे और जो चाहे नीतियाँ बनाये.

संघ ने दो महीने पहले ही कह दिया था कि व्यक्तिगत स्वंत्रता के  नाम पर “लिव इन“ रिश्तो या समलैंगिकता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा क्योंकि यह हमारी संस्कृति और परम्परा के खिलाफ है. संघ की भाजपा की सरकार में क्या भूमिका रहती है यह जग जाहिर है. ऐसे में ऐसे रिश्तों को जीने वाले या उनका समर्थन करने वालों के कितने “अच्छे दिन” आने वाले ये कोई भी अंदाजा लगा सकता है. कश्मीर और उत्तर पूर्व में भेदभाव के खिलाफ आन्दोलनों या  SPECIAL ARMED FORCES ACT  और अल्प्सख्यको पर इन दक्षिणपंथी ताकतों के क्या विचार है यह भी बताने की जरूरत नहीं.

जहाँ तक  “देश के विकास” का प्रश्न है तो मुझे याद नहीं की  भाजपा ने कभी कांग्रेस से हट कर  किसी और वैकल्पिक मॉडल की बात करी हो. मोदी के विकास का मॉडल मनमोहन के मॉडल से कैसे अलग है इस पर भाजपा ने कभी रोशनी नहीं डाली. मोदी के गुजरात  मॉडल में भी कुपोषण, कमज़ोर मानव विकास मानक और किसानो द्वारा आत्महत्या उसी तरह कायम है जैसी की मनमोहन के मॉडल में थी. विकास के  मनमोहन मॉडल की तरह मोदी मॉडल में भी विकास का लाभ सिर्फ जनता के कुछ हिस्सों तक पहुंचा और अधिकांश जनता मूलभूत आवश्यकताओं से वंचित है. इस मायेने में “Shining India” का जो हश्र वो ही “Incredible India”   का भी वही हाल है . मोदी ने रोज़गार के नए अवसर बढाने  और महंगाई कम करने के वादे किये हैं, उन पर उनकी सरकार  किस तरह पूरा करेगी ये किसी को नहीं पता . मोदी मॉडल का विकास कितना समेकित होगा ये आने वाले वक्त में स्पष्ट हो जाएगा. पर एक बात कि यह सरकार अपनी मजबूती का इस्तेमाल आम आदमी के पक्ष में कम और उनके हनन में ज्यादा करेगी .

Advertisements

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s