….और देश सोने की चिड़िया बन जायेगा! — क़मर वहीद नक़वी

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लो जी, अब ख़ुश! लहर आ गयी है! सब जगह लहर बोल रही है. देखो रे देखो, मैं आ गयी! टीवी वाले, अख़बार वाले बता रहे हैं. जैसे मानसून आता है, वैसे ही बता रहे हैं लहर आ रही है. लोग लहरा रहे हैं! भीग-भीग कर झूम रहे हैं! वैसे ही जैसे पब और डिस्कोथिक में लहराते हैं, झूमते हैं. नाचो, गाओ, झूमो! झूम बराबर झूम! न कोई फ़िक्र, न कोई रंज, न कोई ग़म, पूरी रात दुनिया कितनी हसीन होती है! वहाँ भी लहर होती है, यहाँ भी लहर है. वहाँ भी लहर के सिवा कुछ नहीं दिखता, यहाँ भी नहीं दिख रहा है! क्या कीजिएगा? लहर चीज़ ही ऐसी होती है! जब मन लहरा रहा हो, तब की मस्ती के क्या कहने? बदन बिंदास हो तो सब कुछ झकास ही दिखता है! न रोको, न टोको. सुबह होने के पहले कौन सुनना चाहता है होश की बातें? जब रात गुज़रेगी, दिन चढ़ेगा, लहर उतरेगी, तब फिर देखेंगे दुनिया कहाँ, किस हाल में है!

अभी मूड मत ख़राब कीजिए. अभी लहर चढ़ रही है. सब कह रहे हैं. मोदी की लहर है! लहर को आने दो, चढ़ने दो, लहराने दो! जिया लहर लहर लहराये कि मन ललचाये/ गीत कोई गाये रे, सपन मेरे जीवन के मुसकाये/ जिया लहर लहर लहराये!/पचास के दशक की फ़िल्म ‘संसार’ का गाना है यह. लगता है जैसे पंडित इन्द्र ने आज ही लिखा हो! या फिर वह इतने बड़े भविष्यदृष्टा थे कि उन्हें पता था कि 63 साल बाद उनके देश के लोग ऐसा लहरायेंगे कि किसी को उनके गाने की याद आ जायेगी! तो जिया लहरा रहा है, मन मौजिया रहा है, दिल गा रहा है, नैनों में सपने तैर रहे हैं, जादूगर सैंया आयेगा, चुटकी बजायेगा, छड़ी घुमायेगा, और देश सोने की चिड़िया बन जायेगा!Raagdesh-_chasing Namo wave

ऐसा नहीं है कि लहर पहले नहीं आयी है. छोटी-बड़ी लहरें पहले भी आती रही हैं. लेकिन ऐसी वाली लहर आज से पहले कभी देखी नहीं गयी थी! वैसे पता नहीं, जब लहर होती है, तो अकसर दिखती नहीं. और जब लहर दिखती है तो अकसर होती नहीं. इस चुनाव के पहले तक तो हमेशा ऐसा ही होता रहा है. और फिर लहरें आयी और गयीं, हुआ तो कुछ नहीं. लहर के पहले भी लोग हाथ मलते रहते थे, लहर के बाद भी लोग हाथ मलते रहे. 1971 में जब चुनाव हो गये, नतीजे आ गये तो पता चला कि यह इन्दिरा लहर थी, इससे ग़रीबी हट जायेगी! ग़रीबी तो हटी नहीं, 1975 में इमर्जेन्सी ज़रूर लग गयी! देश ने नसबन्दी देखी और हर कोने-अतरे देखा काँग्रेस का सुनहरा नारा, ‘ हम सुनहरे कल की ओर बढ़ रहे हैं.’ वह कल ऐसा सुनहरा आया कि 1977 में ख़ुद इन्दिरा ही चुनाव हार गयीं!

और हाँ, 1977 में कोई ‘जनता लहर’ थी, जो चुनाव के पहले किसी को कहीं नहीं दिखी थी! जब नतीजे आ गये तो पता चला कि यह जनता के बदले की लहर थी! जनता ने ‘बदला’ लेने के लिए वोट दिया था! अमित शाह मार्का ‘बदला’ लेने के लिए नहीं, किसी धर्म-समुदाय के लोगों से बदला लेने के लिए नहीं, बल्कि नसबन्दी और इमर्जेन्सी का बदला लेने के लिए! बदला लिया गया, सरकार बदल गयी! और फिर जब लहर उतर गयी तो दो साल बाद जनता फिर हाथ मल रही थी! जनता पार्टी से हाथ जला चुकी जनता मरती, क्या न करती? 1980 में फिर वह ‘इन्दिरा लहर’ पर सवार थी. यह लहर सबको दिखी, ख़ूब साफ़-साफ़ दिखी और काँग्रेस ने लोकसभा की 351 सीटें जीत लीं! 1971 की इन्दिरा लहर से महज़ एक सीट कम! प्रचण्ड बहुमत! देश ने फिर ख़ालिस्तान आन्दोलन का वह दौर देखा, जब इन्दिरा पर ‘हिन्दू प्रतिक्रियावाद’ को उकसाने, पालने-पोसने के आरोप लगे, आपरेशन ब्लूस्टार देखा. जनता जैसे जी रही थी, जीती रही!

फिर एक बहुत बड़ी लहर आयी 1984 में. लहर क्या, समझिए सुनामी थी. इन्दिरा गाँधी की हत्या के ख़िलाफ़ उमड़ी ‘सहानुभूति लहर’. यह लहर दिखी तो सबको, लेकिन सुनामी होगी, जिसमें सब बह जायेगा, ऐसा किसी ने नहीं देखा, सिर्फ़ दिल्ली की एक पत्रिका को छोड़ कर! काँग्रेस ने 415 सीटें जीतीं, न भूतो, न भविष्यति! सरकार बनी. लेकिन हुआ क्या? शाहबानो मामला हुआ, राम जन्मभूमि का ताला खुला और फिर हुआ ‘सरकारी सहमति’ से उसका शिलान्यास! बोफ़ोर्स का मामला उछला. बड़ी अफ़रातफ़री मची! और 1989 में फिर एक नयी लहर चली, भ्रष्टाचार हटाओ! राजीव गाँधी हट गये, वी. पी. सिंह आ गये. मंडल हुआ, कमंडल हुआ! भ्रष्टाचार वहीं का वहीं रहा या कुछ और फल-फूल गया!

अब इस बार नयी लहर है. पहले की सारी लहरों से बिलकुल अलग! बड़ी लम्बी-चौड़ी लहर बतायी जा रही है! बड़ी चमत्कारी है! जादुई, करिश्माई, दिव्य, भव्य! जोश से ठसाठस भरी बड़ी ठोस लहर है! ठोसों में सबसे ठोस! कर्मठों में सबसे कर्मठ! वीरों में परम वीर! ज्ञानियों में सबसे ज्ञानी! एक चुटकी में इतिहास इधर से उधर! दावा तो भूगोल के बारे में भी कुछ कम नहीं! सारे मसालों से भरपूर! विकास ले लो, सुशासन ले लो, विज्ञापन ले लो, प्रचार ले लो, टेक्नालाजी का टीमटाम ले लो, हुँकार ले लो, ललकार ले लो, फटकार ले लो, हिन्दुत्व ले लो, सेकुलर फ़ेस क्रीम ले लो, दिन में बारम्बार रंग बदलते कुरते ले लो, क्या नहीं है इस लहर में? यह सुपरमैनों की सुपरमैन लहर है? पलक झपकते ही यह दुनिया का कोई भी काम कर दिखा सकती है, हर तरह के साफ़े, पगड़ियाँ, लुँगी, धोतियाँ पहन सकती है, बस एक ‘गोल टोपी’ नहीं पहन सकती! दुनिया में न आज से पहले ऐसी कोई लहर पैदा हुई, न कभी पैदा होगी. यह हम समस्त भारतवासियों के समस्त पूर्व जन्मों के समस्त पुण्यों का प्रताप है कि ईश्वर ने हमें ऐसी चमत्कारी लहर भेजी है, जो युगों-युगों से चली आ रही हमारी समस्त समस्याओं का एक चुटकी में निराकरण कर देगी, देश सर्वसम्पन्नता की चरम स्थिति को प्राप्त कर लेगा और संघ को अपने ‘परम वैभव’ के स्वप्न को पाने का मार्ग मिल जायेगा!

बाक़ी लहरों में नहीं था, लेकिन इस लहर में ज़हर भी है. अमित शाह अपनी ‘नो बाल’ से उसका एक छोटा-सा नमूना दिखा भी चुके हैं! वैसे अचरज क्या? यह लहर मामूली लहर नहीं. समुद्र मंथन वाली लहर है, जिसमें अमृत भी निकलता है और विष भी! अमृत कौन पियेगा, और विष किसके हिस्से आयेगा, यह लहर ही तय करेगी! लेकिन सवाल है कि क्या सचमुच कहीं कोई लहर है भी या सिर्फ़ लहर बनायी और दिखायी जा रही है? और लहरों से कितनी उम्मीद रखनी चाहिए, यह पहले की लहरें बता ही रही हैं. लहर में लहराने से पहले लहर को थोड़ा ठहर कर देखना और गुनना चाहिए! बहरहाल, अब यह 16 मई को ही तय होगा कि लहर लहरी या नहीं!
(लोकमत समाचार, 19 अप्रैल 2014)

2 thoughts on “….और देश सोने की चिड़िया बन जायेगा! — क़मर वहीद नक़वी

  1. IT IS A SHAME NO ONE IS TALKING ABOUT BJP’s Economic and Foreign Policies. MERELY CHANGING OF THE RULING DISPENSION FROM CONGRESS TO BJP WILL NOT CHANGE THINGS IN INDIA: The development model of Gujarat has largely benefited the already rich industrialists. The pertinent question here is: Should ‘development’ be limited only to a few powerful Business houses?? Shouldn’t it be inclusive?? Are large industrial projects that uproot the common man from their farmlands, forest and natural environs, the only way to take the nation forward? The answer is a stern NO!! All across the nation businesses are robbing the country of its natural wealth. There is lack of transparency and massive corruption in allocation of natural resources as unearthed by media and constitutional bodies like the CAG . Merely changing of the ruling dispensation from Congress to the BJP will not change things. When corporate make thousands of crores and build billion dollar skyscrapers to live, while the common man struggles to get drinking water, health care, toilets, schools, shelter – it does not bode well for the country. (AN HONEST WRITER)
    For 1100 acres of land in Sanad in 2008 Tata Motors paid Rs 900/sqm to the Gujarat Government. The government acquired the land at Rs 1,200 per square meter.
    Tata Motors only invested Rs 2000 crores and got a government loan of Rs 9,570 crore for 20 years at 0.1 per cent rate of interest. This loan was 23% of Gujarat ’s budget for 2008. On top of other subsidizes;100 acres of land at a highly subsidized rate near Ahmedabad for Tata township.
    Modi has lured away Nano plant using huge amount of money directly from Gujarat government’s coffers. What has the state gained till now, Nano has failed, so have “cascading effects of the plant” Tata Motors’ Sanand plant stays idle (April 2013 plant utilization was mere 4.5%).
    The attraction for corrupt Industrial Houses and MNC ’s is not Modi but Free Money.
    Practically same story is for Ford, Suzuki, ADANI, Ambani etc. on top of this they all received various Incentives in other words poor Tax Payers are paying to the rich multi billion corporations.
    Total Subsidies to TATA Rs 30,000 Crore, Suzuki 20,000 Crore & Ford 20,000 Crore
    Under Modi Rule Adani GP revenue from $765 Million in 2002 rose to $8.8 Billion in March 2013 while net profits climbed even faster.
    Income Tax Incentives
    10 year corporate tax holiday on export profit – 100% for initial 5 years and
    50% Corporate Tax Holiday for the next 5 years
    Exemption from dividend distribution tax
    Indirect Tax Incentives
    Zero customs duty
    Zero excise duty
    Exemption from central sales tax
    Exemption from service tax
    During the same time 60,000 small scale industries shut down
    Over 5,500 farmers in the last 10 years have committed suicide in the state but police have been instructed by Modi govt not to register cases.
    CAG reports from 2001-2012/13 show corruption to the tune of Rs 1.5 lakh crore. The state took nine years to appoint a Lok Ayukta.”
    Gujarat’s budget increased from Rs 28,000 crore in 2001 to Rs 1,20,000 crore in 2013-14, public debt during the same period increased from Rs 26,000 crore to Rs 1,76,000 crore.”
    This is the last chance for Indian voters to take responsibility of India the country they love and cherish. The Indian voters to save India must dump Congress & BJP in the nearest gutter in this Lok Sabha elections in 2014. India do not need failed Pro Rich Zionist/Jewish Economic as well inhuman Zionist/Jewish Foreign Policies of Jewnited States of America where the top 1% owns 43% of the US assets, 9% owns 40%, 10% owns 10% and bottom 80% owns princely 7% US assets. I HAVE A VERY SIMPLE QUESTION TO EVERY INDIAN LEADER, IF THE ZIONIST (PRO RICH) ECONOMIC POLICIES HAVE BECOME A CURSE FOR AMERICA ; HOW IT CAN BECOME A BLESSING FOR POOR INDIANS?
    http://americafraud.blogspot.com/2013/09/USEconomicPoliciesRecipeToKillMainStreet.html

  2. Wrong Business ?

    Talking about Narendra Modi’s ” Crony Capitalism ” , Rahul Gandhi said ,

    ” During 12 years of NaMo’s rule in Gujarat , Gautam Adani’s companies ‘
    assets ( or did he mean , Market Cap ? or Revenue ? it does not matter )
    went up from Rs 3000 crores to Rs 40,000 crores ”

    That is a CAGR ( Compounded Annual Growth Rate ) of 25 %

    Now look at the assets declared by the Congress Candidates of the current Lok Sabha elections ( Let us not inquire re: Undeclared Assets ! )

    Within 5 years ( from 2009 to 2014 ) , the average assets of these Congressmen , went up from Rs 4.87 crores to Rs 54.38 crores !

    That is a CAGR of 62 % !

    So , which is a better business ?

    > Building Nation by building Ports , Power Stations , Infrastructure etc ?

    OR

    > Fooling Nation by robbing its precious natural resources , such
    Spectrum , Coal , Gas , Minerals , etc ?

    > Not revealing the names of 50 individuals who have stashed away black
    money in German Banks – and whose names , German Government has
    provided 3 years back ?

    > Promoting ” Crony Relative-ism ” when it comes to buying government
    land for Rs 1 lakh / hectare and selling for Rs 100 lakhs / hectare ?

    Gautambhai ,

    Obviously , you are in the wrong business !

    Switch over to sycophancy !

    Enjoy a CAGR of 200 % !

    Then , like late Babu Jagjivan Ram , don’t file your Income Tax Return for next 10 years – and , if reminded , say , ” I just forgot ” !

    * hemen parekh ( 24 April 2014 / Mumbai )

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