विनाशकाले विपरीत बुद्धि – कँवल भारती (Kanwal Bharti)

Kanwal B

कहाबत है कि जब विनाश काल आता है, तो बुद्धि भी विपरीत हो जाती है. सो वही हाल आजकल अपनी कांग्रेस नेत केंद्र सरकार का है. अमेरिका में भारतीय राजनयिक देवयानी खोब्रागडे के अपमान पर भारत सरकार ने जो कदम अमेरिकी दूतावास के खिलाफ उठाये हैं, वह एक लोकतान्त्रिक राष्ट्र को कतई शोभा नहीं देते. यह तो गुंडई से लड़ने के लिए खुद गुंडई करने जैसा है. इसकी अमेरिकी मीडिया में जितनी निंदा हो रही है, उसने भारत के लोकतान्त्रिक विवेक पर कितना बड़ा सवालिया निशान लगाया है, इसका अहसास तक हमारी सरकार को नहीं है. क्या सवाल सिर्फ देवयानी के अपमान का है? क्या इससे पहले किसी भारतीय राजनयिक का अपमान अमेरिका में नहीं हुआ था? तब तो भारत सरकार ने अमेरिकी दूतावास के खिलाफ इतनी बड़ी कार्यवाही नहीं की थी. अब देवयानी को लेकर कौन सा पहाड़ टूट पड़ा, जो उसने न सिर्फ अमेरिकी दूतावास की सुरक्षा हटा दी, बल्कि उसके विशेषाधिकार तक कम कर दिए? क्या इसके पीछे दलित वोट की राजनीति है? अगर कांग्रेस यह सोच रही है कि देवयानी खोब्रागड़े दलित परिवार से है, और लोकसभा चुनावों में दलित वोट को आकर्षित करने के लिए उसके पक्ष में माहौल बना रही है, तो मुझे नहीं लगता कि उसे इसका कुछ भी लाभ मिल सकेगा.

निश्चित रूप से यह अपमानजनक है कि अमेरिकी पुलिस ने देवयानी को हथकड़ी लगायी और उनके कपड़े उतरवा कर तलाशी ली है. पर इसे इस तरह क्यों नहीं देखा जा रहा है कि यह एक राजनयिक के अपमान से ज्यादा एक मेड के साथ न्याय का भी मामला है. इस पूरे प्रकरण को सामाजिक न्याय की दृष्टि से देखने के वजाय दलित-उत्पीड़न की दृष्टि से क्यों देखा जा रहा है?

एक बड़ा सवाल यह भी यहाँ विचारणीय है कि पुलिस के जिस बर्ताव से कांग्रेस सरकार को परेशानी हो रही है, उसमें अजूबा क्या है? क्या भारत की पुलिस दूध की धूली है? क्या वह जनता के साथ भलमनसाहत से पेश आती है? भूल गयी कांग्रेस सरकार, छत्तीसगढ़ की पुलिस की मर्दानगी, जिसने आदिवासी महिला सोरी के साथ निर्लज्ज अपमान ही नहीं किया था, बल्कि उसे अमानवीय और बर्बर यातनाएं भी दी थीं? उसके गुप्तांग में पत्थर भरे थे और उसके परिवार को कितनी भयानक यातनाएं दी थीं? आज भी कितने ही आदिवासी, दलित और गरीब आदमी रोज पुलिस के द्वारा अपमानित होते हैं? क्या उनका अपमान इसलिए अपमान नहीं है, क्योंकि अपमानित होने वाले वे आदमी राजनयिक या वीवीआईपी नहीं है? क्या अपमान सिर्फ राजनयिक या वीवीआईपी का ही होता है? अगर आम आदमी का दर्द सरकार की चिंता में बिलकुल नहीं है, तो राजनयिक देवयानी के अपमान पर कांग्रेस की हायतौबा से उसका वोट बैंक बढ़ने वाला नहीं है. वोट बैंक तभी बढ़ेगा, जब वह आम आदमी के सम्मान और उत्थान की चिंता करेगी.
(१८-१२-२०१३)

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