काली आंधियां रामराज्य के इसी जघन्य अपराध और पाप के कारण चल रही हैं!

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झंझावत। काली आंधियां। वन-प्रांतरों में मचता कोहराम। इधर-उधर विक्षित्प से भागते वन्य जीव। इतना अधिक क्रन्दन और चीख-पुकार। अदीब ने दोनों कानों पर हाथेलियां रख के अपने श्रवण स्रोत बंद कर लिए और चीखा-महमूद!

कोई उत्तर नहीं आया। वह फिर चीख़ा, फिर भी उसे कोई जवाब तो नहीं मिला, पर देखा, सामने से गिरता-पड़ता-हांफता महमूद आ रहा है।

कहां थे तुम?

हुज़ूर….मैं पिछली सदियों में चला गया था।

पिछली सदियों में…क्यों?

मैं अपने पूर्वजों से मिलने गया था!

पूवर्जों से…अदीब ने आश्चर्य से पूछा।

हुजूरे आलिया! आपको इतना ताज्जुब क्यों हो रहा है….हमारा मज़हब सबसे नया है…हमने इसे बेहतर बताया…तभी तो हम पुराने, धर्मोँ को छोड़कर इस्लाम में आए हैं…इसका यह मतलब तो नहीं कि हमारे कोई पूर्वज नहीं हैं। वे चाहे जैसे भी रहे हों…पतित या पवित्र…पर हैं तो हमारे पूर्वज ही!

यह बहस इस समय छोड़ो….सबसे पहले यह मालूम करो कि काली आंधियां क्यों चल रही हैं…यह वन्य पशु व्याकुल होकर क्यों भाग रहे हैं। यह हाहाकार क्यों हो रहा है।

शायद इसकी वजह शंबूक की हत्या होगी!

शंबूक?

हां हुजूर! मैं खुद अपने पूर्वज राजा रामचंद्र को देखकर आया हूं…जब-जब इस धरती पर धर्म की हानि होती है, तब-तब यह काली आंधियां चलती हैं…मैंने अपनी आंखों से देखा है….सुबह का समय था हुजूर…अयोध्या का राजप्रसाद वेद मंत्रों की पवित्र ध्वनि से गूंज रहा था। अयोध्या के राजा रामचंद्र अश्वमेघ यज्ञ की घोषणा करने से राजप्रसाद से अभी बाहर आए ही थे कि यज्ञ की घोषणा से पहले उन्होंने एक ब्राह्मण का करुण रोदन-क्रंदन सुना..वे हतप्रभ रह गए। हमारे रामराज्य में यह करुण विलाप कैसा और क्यों?

एक अमात्य ने आगे बढ़कर क्रन्दन करते ब्राह्मण को उनके सामने कर दिया-महाराजाधिराज!…यह ब्राह्मण ही विलाप का कारण बता सकता है….

वह ब्राह्मण अपने पुत्र के मृत शरीर को छाती से लगाए राजा रामचंद्र को धिक्कारने लगा-अयोध्यापति राम! पिता के सामने पुत्र की मृत्यु। यह कैसा रामराज्य है तुम्हारा? तुम हत्यारे हो मेरे पुत्र के! तुम!

तभी हुजूरे आलिया! लोगों में कानाफूसी होनी लगी…यह तो घोर पाप है…ब्राह्मण का बेटा मर जाए और क्षत्रिया राजा कुछ न कर सके, यह तो अनिष्ट का लक्षण है!

सतयुग में ऐसा नहीं हो सकता! इसका कोई कारण होना चाहिए…

कारण मैं बताता हूं! तभी नारदजी ने हमेशा की तरह हाज़िर होकर राजा रामचंद्र को बताया-महाराजाधिराज राम! धर्मशास्त्रों के अध्ययन, तप और साधना से मोक्ष को प्राप्त करने का अधिकार केवल ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य वर्णों को है, लेकिन भगवन! आपके रामराज्य में एक महापातकी घटना घटी! उसका कारण है शुद्रवंशी शंबूक! जो अपने दास धर्म को त्याग कर मोक्ष के लिए साधना कर रहा है…इस महापाप के कारण ही ब्राह्मण-पुत्र की मृत्यु हुई है महाराज! नारदजी ने सूचना दी। बस फिर क्या था अदीबे आलिया! राजा रामचंद्र जी ने क्षत्रिय धर्म का पालन किया और ब्राह्मण की रक्षा के लिए शुद्र शंबूक जैसे ऋषि और तपस्वी की गर्दन काट कर धड़ से अलग कर दी। यह झंझावत और काली आंधियां रामराज्य के इसी जघन्य अपराध और पाप के कारण चल रही हैं!

 कमलेश्वर के बहुचर्चित उपन्यास ‘कितने पाकिस्तान’ से। 

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